भाकृअनुप-केवीके (सीआईएसएच), मालदा में ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमी और एग्रो-एंबेसडर के रूप में सशक्त बनाने के लिए आईराईज कार्यक्रम का शुभारंभ

भाकृअनुप-केवीके (सीआईएसएच), मालदा में ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमी और एग्रो-एंबेसडर के रूप में सशक्त बनाने के लिए आईराईज कार्यक्रम का शुभारंभ

21 सितंबर, 2026, मालदा

आज भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत भाकृअनुप-केवीके (सीआईएसएच), मालदा में 23 दिवसीय आईराईज (Inculcating Rural India Skill Enhancement) कौशल विकास कार्यक्रम के उद्घाटन के साथ युवा-नेतृत्व वाले कृषि परिवर्तन के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को व्यावहारिक कौशल, उद्यमशीलता क्षमताओं और उद्योग के अनुभव से लैस करना है, जिससे वे कृषि अवसरों को टिकाऊ आजीविका और उद्यमों में बदल सकें।

उद्घाटन संबोधन वर्चुअल माध्यम से देते हुए डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने आईराईज को सीएसआर-संचालित परिवर्तनकारी पहल के रूप में रेखांकित किया, जो कुशल, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार ग्रामीण युवाओं की नई पीढ़ी तैयार कर रही है। उन्होंने जोर दिया कि यह कार्यक्रम पारंपरिक कौशल प्रशिक्षण से आगे बढ़कर व्यावहारिक प्रशिक्षण, क्षेत्रीय अनुभव और उद्योग से जुड़े इंटर्नशिप को एकीकृत करता है, ताकि आकांक्षाओं को रोजगार-योग्यता और उद्यमिता में बदला जा सके।

डॉ. डे ने रेखांकित किया कि कृषि विज्ञान केंद्र और सिंजेन्टा फाउंडेशन इंडिया के बीच साझेदारी प्रभावी सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से ग्रामीण सशक्तिकरण और कृषि परिवर्तन के विस्तार योग्य मॉडल तैयार करने की क्षमता को प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें जमीनी स्तर पर ग्रामीण युवाओं के लिए अवसर पैदा करके विकसित भारत @2047 के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

IRise Programme Launched at ICAR-KVK (CISH), Malda to Empower Rural Youth as Agri-Entrepreneurs and Agro-Ambassadors

आईराईज कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य प्रतिभागियों को विविधीकृत आजीविका उद्यमों में व्यावहारिक ज्ञान के साथ कृषि उद्यमियों के रूप में विकसित करना है, जिसमें मशरूम की खेती, नर्सरी प्रबंधन, मुर्गी पालन, वर्मीकम्पोस्टिंग और वैज्ञानिक बागवानी शामिल हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा प्रतिभागियों को स्थानीय स्तर पर व्यवहार्य अवसरों की पहचान करने, उद्यम-केंद्रित कौशल विकसित करने और स्वरोजगार तथा आय-सृजन गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए आत्मविश्वास विकसित करने में सहायता करना है।

आईराईज की एक विशिष्ट विशेषता प्रतिभागियों को “एग्रो-एंबेसडर” के रूप में विकसित करने पर इसका ध्यान केंद्रित करना है—ऐसे युवा ग्रामीण परिवर्तनकर्ता, जो किसानों, कृषि प्रौद्योगिकियों, संस्थानों और उद्योग के बीच की खाई को पाटने में सहायता कर सकें। संरचित प्रशिक्षण और क्षेत्र-आधारित अनुभव के माध्यम से, इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण Gen Z को कृषि प्रौद्योगिकी प्रसार, नवाचार और उद्यमिता में सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करना है।

यह कार्यक्रम संस्थान–उद्योग अभिसरण के एक महत्वपूर्ण मॉडल का भी प्रतिनिधित्व करता है, जो दर्शाता है कि कृषि विज्ञान केंद्रों और कॉर्पोरेट क्षेत्र के सामूहिक प्रयास किस प्रकार ग्रामीण आजीविका को मजबूत कर सकते हैं, युवा उद्यमिता को बढ़ावा दे सकते हैं और अधिक लचीले तथा प्रौद्योगिकी-सक्षम कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान कर सकते हैं।

IRise Programme Launched at ICAR-KVK (CISH), Malda to Empower Rural Youth as Agri-Entrepreneurs and Agro-Ambassadors

उद्घाटन कार्यक्रम में मालदा और आसपास के जिलों से 18–35 वर्ष की आयु के 65 युवा कृषि-उद्यमिता के इच्छुक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कौशल, उद्यम विकास, क्षेत्रीय अनुभव और उद्योग संपर्क पर अपने एकीकृत ध्यान के साथ, IRise ग्रामीण युवाओं को रोजगार सृजक, प्रौद्योगिकी प्रसारक और कृषि क्षेत्र में जमीनी स्तर के नेतृत्वकर्ता बनने के लिए एक मजबूत मार्ग प्रदान करने के लिए तैयार है, जिससे अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण में योगदान दिया जा सके।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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