भाकृअनुप के महानिदेशक ने भाकृअनुप-आईएआरआई, झारखंड में अनुसंधान स्कूल भवनों तथा सभागार की रखी आधारशिला

भाकृअनुप के महानिदेशक ने भाकृअनुप-आईएआरआई, झारखंड में अनुसंधान स्कूल भवनों तथा सभागार की रखी आधारशिला

8-9 अक्टूबर, 2026, झारखंड

डॉ. एम.एल. जाट, डेयर के सचिव एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, ने भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, झारखंड में भूमि पूजन समारोह के दौरान अनुसंधान स्कूल भवनों एवं सभागार की आधारशिला रखी। इन भवनों की अनुमानित लागत क्रमशः ₹21 करोड़ और ₹24.7 करोड़ है। डॉ. डी.के. यादव, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप, भी दौरे के दौरान उनके साथ थे।

इस दौरे में अनुसंधान अवसंरचना और फार्म विकास को मजबूत करने के लिए जारी प्रयासों पर प्रकाश डाला गया, जिसके लिए ₹13.5 करोड़ का आवंटन किया गया है। डॉ. जाट ने छात्रों, किसानों और संस्थान के कर्मचारियों के साथ संवाद किया, किसानों को कृषि आदान वितरित किए, अनुसंधान फार्म का दौरा किया, बहादुर बांध में कार्प मछली की अंगुलिकाएं छोड़ीं और परिसर में पौधरोपण अभियान में भाग लिया।

DG, ICAR Lays Foundation Stones for Research School Buildings and Auditorium at ICAR-IARI, Jharkhand

भाकृअनुप-आईएआरआई, झारखंड को पूर्वी भारत में कृषि विकास के लिए एक आत्मनिर्भर मॉडल फार्म और उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर देते हुए डॉ. जाट ने प्रमुख अनुसंधान प्राथमिकताओं को रेखांकित किया, जिनमें अम्लीय मृदा प्रबंधन, जनजातीय आजीविका संवर्धन, कृषि विविधीकरण, मृदा एवं जल संरक्षण, मृदा उर्वरता प्रबंधन और नैनो-आधारित उर्वरकों पर परीक्षण शामिल हैं।

उन्होंने वर्षा जल संचयन, लिफ्ट एवं ड्रिप सिंचाई, सौर ऊर्जा चालित सिंचाई, क्षेत्र-विशिष्ट कृषि मशीनीकरण, उन्नत चारा उत्पादन एवं प्रसंस्करण तथा फसल और पशुधन अवशेषों के पुनर्चक्रण के माध्यम से कुशल संसाधन प्रबंधन पर भी जोर दिया। बीज और रोपण सामग्री उत्पादन को मजबूत करने, उन्नत किस्मों एवं प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने तथा बाहरी वित्त पोषित अनुसंधान के विस्तार पर भी प्रकाश डाला गया।

DG, ICAR Lays Foundation Stones for Research School Buildings and Auditorium at ICAR-IARI, Jharkhand

डॉ. जाट ने जोर दिया कि भाकृअनुप-आईएआरआई, झारखंड को अन्य भाकृअनुप संस्थानों के सहयोग से फसल उत्पादन, पशुधन और मत्स्य पालन को जोड़ने वाले एक एकीकृत कृषि केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए। उन्होंने वार्षिक प्रगति, अनुसंधान परिणामों, प्रमुख उपलब्धियों और अवसंरचना विकास के दस्तावेजीकरण के महत्व को भी रेखांकित किया।

डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, के साथ भाकृअनुप-आईएआरआई, झारखंड के केन्द्र प्रभारी, सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारियों, संस्थान के कर्मचारियों और छात्रों ने समारोह में भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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