अफ्रीकी जायंट स्नेल के प्रबंधन से उदयपुर में संक्रमण में 60–70% की कमी हासिल

अफ्रीकी जायंट स्नेल के प्रबंधन से उदयपुर में संक्रमण में 60–70% की कमी हासिल

24 सितंबर, 2026, उदयपुर

भाकृअनुप–राष्ट्रीय समेकित कीट प्रबंधन अनुसंधान केन्द्र, नई दिल्ली ने जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) के तहत “अफ्रीकी जायंट स्नेल का एकीकृत प्रबंधन: एक सफलता की कहानी” विषय पर उदयपुर के बिछीवाड़ा गांव में किसानों की कार्यशाला आयोजित की। कार्यक्रम में किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा अफ्रीकी जायंट स्नेल के बढ़ते प्रकोप के प्रबंधन के प्रभावी और टिकाऊ उपायों पर विचार-विमर्श किया।

डॉ. रमन थंगावेलु, निदेशक, भाकृअनुप-एनआरआईआईपीएम, नई दिल्ली, मुख्य अतिथि थे। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने गंभीर कीट समस्याओं के समाधान में एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) और किसानों की सक्रिय भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अफ्रीकी जायंट स्नेल के सफल प्रबंधन को इस बात के उदाहरण के रूप में रेखांकित किया कि वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों के सहयोग से किसानों और वैज्ञानिकों के समन्वित प्रयास प्रभावी परिणाम दे सकते हैं।

African Giant Snail Management Achieves 60–70% Reduction in Infestation in Udaipur

डॉ. थंगावेलु ने जोर दिया कि केवल रासायनिक उपायों पर निर्भर रहना प्रभावी घोंघा प्रबंधन के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सांस्कृतिक, यांत्रिक, जैविक और रासायनिक विधियों को मिलाकर एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की। किसानों को सुबह और शाम के समय घोंघों को हाथ से चुनकर नष्ट करने, मिट्टी से घोंघों के अंडों को निकालने, यीस्ट या गुड़ आधारित ट्रैप का उपयोग करने तथा पक्षियों और मेंढकों जैसे प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण करने की सलाह दी गई। आवश्यकता पड़ने पर मेटल्डिहाइड, आयरन फॉस्फेट, कॉपर सल्फेट, नमक और चूने के विवेकपूर्ण उपयोग की भी सिफारिश की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन के साथ हुई, जिसमें कृषि क्षेत्रों में घोंघों के बढ़ते प्रकोप और वैज्ञानिक प्रबंधन प्रथाओं के संबंध में किसानों में अधिक जागरूकता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।

मुख्य वैज्ञानिक सत्र में अफ्रीकी जायंट स्नेल के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) रणनीतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। यह एक अत्यधिक बहुभक्षी और विनाशकारी कीट है, जो मक्का, सब्जियों, दलहनों और फलदार पौधों सहित विभिन्न फसलों को प्रभावित करता है। वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से विकसित प्रबंधन प्रौद्योगिकियों का किसानों के खेतों में प्रदर्शन किया गया और इसके परिणामस्वरूप घोंघों के प्रकोप में 60–70% की कमी आई। इस हस्तक्षेप से न केवल फसलों की सुरक्षा में मदद मिली, बल्कि कृषि आय में भी वृद्धि हुई, जो अनुसंधान प्रयोगशालाओं से किसानों के खेतों तक वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों के प्रभावी हस्तांतरण को प्रदर्शित करता है।

African Giant Snail Management Achieves 60–70% Reduction in Infestation in Udaipur

कार्यशाला ने किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद के लिए एक मंच भी प्रदान किया, जिससे किसानों को खेत स्तर की समस्याओं को साझा करने और व्यावहारिक समाधान प्राप्त करने में मदद मिली। कार्यक्रम का समापन टिकाऊ फसल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत घोंघा प्रबंधन प्रथाओं को व्यापक रूप से अपनाने के आह्वान के साथ हुआ।

क्षेत्र में अफ्रीकी जायंट स्नेल का सफल प्रबंधन किसान–वैज्ञानिक सहयोग और प्रौद्योगिकी-आधारित कीट प्रबंधन के एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है, जिसे समान चुनौतियों का सामना करने वाले किसानों के बीच व्यापक रूप से अपनाए जाने की संभावना है।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय समेकित कीट प्रबंधन अनुसंधान केन्द्र, नई दिल्ली)

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