केवीके हावड़ा में जैविक तथा प्राकृतिक खेती में क्षमता निर्माण के माध्यम से किसानों का किया सशक्तिकरण

केवीके हावड़ा में जैविक तथा प्राकृतिक खेती में क्षमता निर्माण के माध्यम से किसानों का किया सशक्तिकरण

8 दिसंबर, 2025, हावड़ा

आज कृषि विज्ञान केन्द्र, हावड़ा, में भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता, के तत्वावधान में क्षेत्रीय जैविक और प्राकृतिक खेती केन्द्र (आरसीओएनएफ), भुवनेश्वर और केवीके हावड़ा द्वारा संयुक्त रूप से जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर एक किसान प्रशिक्षण-सह-प्रदर्शन कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विशेषज्ञ बातचीत तथा व्यावहारिक प्रदर्शनों के माध्यम से टिकाऊ, रसायन-मुक्त खेती के तरीकों में किसानों के ज्ञान एवं कौशल को मजबूत करना था।

प्रतिभागियों को वर्चुअली संबोधित करते हुए, डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने चर्चाओं को विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ा और जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि परिवर्तन के लिए जमीनी स्तर पर उत्प्रेरक के रूप में केवीके की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों एवं स्वदेशी ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से मान्य तरीकों के साथ रणनीतिक रूप से एकीकृत करके, जैविक और प्राकृतिक खेती प्रणालियों को धीरे-धीरे अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह का तालमेल खेत की लचीलापन बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार करने, पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने और 2047 तक आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लक्ष्य में सार्थक योगदान देने के लिए महत्वपूर्ण है।

Empowering Farmers through Capacity Building in Organic and Natural Farming at KVK Howrah

डॉ. मनोज कुमार, सहायक निदेशक, आरसीओएनएफ, भुवनेश्वर (पूर्वी क्षेत्र), ने जैविक और प्राकृतिक खेती प्रणालियों में बदलाव करने वाले किसानों हेतु उपलब्ध संस्थागत सहायता पर प्रकाश डाला तथा गुणवत्तापूर्ण जैविक आदानों और मजबूत प्रमाणन तंत्र के महत्व पर जोर दिया।

केवीके हावड़ा के प्रमुख ने स्वागत संबोधन दिया, जिसमें मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, इनपुट लागत को कम करने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने में जैविक एवं प्राकृतिक खेती के महत्व को रेखांकित किया।

तकनीकी सत्रों में जैविक आदानों के मूल सिद्धांत और गुणवत्ता मानक, मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन एवं पोषक तत्व चक्र, प्राकृतिक खेती में विस्तार रणनीतियाँ तथा किसान-नेतृत्व वाले नवाचार, और जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लिए बायो-इनपुट की तैयारी के साथ अनुप्रयोग पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सहित प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया।

कुल मिलाकर, इस कार्यक्रम ने हावड़ा जिले के छह ब्लॉकों के 50 किसानों के बीच प्रभावी क्षमता निर्माण, ज्ञान के आदान-प्रदान और अनुभवात्मक शिक्षा को सुविधाजनक बनाया, जो टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए भाकृअनुप, आरसीओएनएफ तथा केवीके की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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