कोलकाता, 10 जुलाई 2012
केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान, मुंबई ने कोलकाता केंद्र पर प्रेरित प्रजनन तकनीक की खोज को याद करते हुए राष्ट्रीय मछली पालक किसान दिवस का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल सरकार के मत्स्य, जलीय संसाधन और बंदरगाह विभाग के मंत्री श्री सुब्रत साहा थे। उन्होंने श्रोताओं को आईएमसी व अन्य विलुप्तप्राय मछलियों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए 6 मॉडल एक्वाफार्म विकसित करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से अवगत कराया। डॉ. पी. दास, पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएफजीआर), लखनऊ, प्रोफेसर डॉ. एन.सी. दत्ता, पूर्व प्रोफेसर व प्रमुख, कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा श्री बी.सी. साहा, आईएएस, निदेशक, मत्स्य पालन विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार, कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि थे।
डॉ. डब्ल्यू.एस. लाकड़ा, निदेशक व उपकुलपति, सीआईएफई ने इस अवसर पर डॉ.हीरालाल चौधरी और प्रोफेसर के.एच. अलीकुन्ही द्वारा 10 जुलाई 1957 को बड़ी मछलियों में प्रेरित प्रजनन पर किए गए अग्रणी कार्य की सराहना की तथा देश में मत्स्य पालन में वैज्ञानिक व स्थायी विकास के लिए ग्रामीण इलाकों में इस तकनीक के होने वाले अनेक उपयोग की भी सराहना की।
इस मौके पर अनेक मछली पालक किसानों ने साथी किसानों का हौसला बढ़ाने के लिए अपने सफल प्रयोगों से उन्हें परिचित कराया। किसानों और विशेषज्ञों ने प्रत्येक प्रस्तुति के बाद चर्चा में भी भाग लिया। साथ ही मत्स्य पालन में सराहनीय सहयोग करने के लिए राज्य के दो मछली पालक किसानों, दो वैज्ञानिकों तथा एक मास मीडिया संस्थान को सम्मानित भी किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न भागों के लगभग 80 किसानों ने भाग लिया जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक महिला किसान थीं।
(स्त्रोत् : सीआईएफई, मुंबई)