भाकृअनुप-सिफरी, बैरकपुर ने संतुलित उर्वरीकरण एवं राष्ट्रीय भूमि सुपोषण अभियान के माध्यम से मृदा–मत्स्य समन्वय को सशक्त किया

भाकृअनुप-सिफरी, बैरकपुर ने संतुलित उर्वरीकरण एवं राष्ट्रीय भूमि सुपोषण अभियान के माध्यम से मृदा–मत्स्य समन्वय को सशक्त किया

10 अप्रैल, 2026, बैरकपुर

सतत संसाधन प्रबंधन के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दर्शाते हुए भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सिफरी) ने संतुलित उर्वरकों के उपयोग पर गहन अभियान तथा देशव्यापी भूमि सुपोषण एवं संरक्षण जन अभियान में सक्रिय भागीदारी की। इस पहल के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य तथा अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन के बीच महत्वपूर्ण संबंध को रेखांकित किया गया।

मृदा उर्वरता की पुनर्स्थापना एवं संतुलित पोषक तत्व उपयोग को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय सोच के अनुरूप, भाकृअनुप-सिफरी ने मृदा, जल एवं मत्स्य प्रणालियों को जोड़ने वाला समेकित दृष्टिकोण अपनाया। संस्थान ने स्पष्ट किया कि स्वस्थ तालाब एवं आर्द्रभूमि की मिट्टी पोषक तत्व चक्रण, प्लवक (प्लैंकटन) उत्पादन तथा अधिक मत्स्य उत्पादन के लिए आधारभूत है, जो पारिस्थितिक संतुलन एवं आजीविका स्थिरता सुनिश्चित करती है।

ICAR-CIFRI, Barrackpore Reinforces Soil–Fisheries Synergy through Intensive Drive on Balanced Fertilization and the National Bhumi Suposhan Campaign

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सिफरी, ने कहा कि जलग्रहण क्षेत्रों में असंतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा क्षरण और पोषक तत्वों का बहाव बढ़ता है, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण आधारित सिफारिशों और मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर आधारित वैज्ञानिक पोषक प्रबंधन दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मृदा पुनर्जीवन के लिए हरी खाद के माध्यम से जैविक पदार्थ बढ़ाने, जैविक आदानों एवं जैव उर्वरकों के साथ समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) को बढ़ावा देने तथा एनपीके, एसएसपी एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग जरूरी है। साथ ही यूरिया और डीएपी के अंधाधुंध उपयोग से बचने की आवश्यकता पर बल दिया।

संस्थान के विभिन्न प्रभागों के प्रमुखों और विशेषज्ञों ने तालाब की तली की मिट्टी की गुणवत्ता के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण कार्यक्रमों और क्षेत्रीय संवादों के माध्यम से व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक समाधान किसानों और मत्स्य पालकों तक पहुंचाए गए।

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भाकृअनुप-सिफरी ने पुनः दोहराया कि वह सतत मत्स्य विकास के लिए मृदा और जल स्वास्थ्य के समेकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह प्रयास खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान देता है। यह पहल दर्शाती है कि स्वस्थ मिट्टी केवल सुदृढ़ कृषि ही नहीं, बल्कि समृद्ध अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र की भी आधारशिला है।

कार्यक्रम में कांथी क्षेत्र के मत्स्य पालकों ने सक्रिय भागीदारी कर जमीनी स्तर पर सहभागिता को मजबूत बनाया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)

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