7 अप्रैल, 2026, हैदराबाद, तेलंगाना
भाकृअनुप-भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईआएमआर), हैदराबाद, ने 7–8 अप्रैल, 2026 तक “किसान उत्पादक संगठनों (एफपो) के लिए खरीफ योजना एवं विपणन संपर्क” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में एफपीओ नेताओं, विषय विशेषज्ञों तथा संस्थागत हितधारकों ने भाग लिया।

इस पहल का उद्देश्य आगामी खरीफ मौसम के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना, एफपीओ सदस्यों को गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता कराना तथा विशेष रूप से कर्नाटक के एफपीओ के निदेशक मंडल (बाओडीएस) की नेतृत्व क्षमता को मजबूत बनाना है।
अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएमआर, ने खरीफ फसल योजना को बाजार मांग के अनुरूप बनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एफपीओ किसानों की सामूहिक उपज एकत्रीकरण, सौदेबाजी क्षमता बढ़ाने तथा बेहतर मूल्य प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक योजना, उन्नत मिलेट किस्मों को अपनाने तथा मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण गतिविधियों को जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।
श्री साइमन पसाला, परियोजना प्रबंधक, आईसीआईसीआई फाउंडेशन, ने एफपीओ को सशक्त बनाने में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचे के विकास, क्षमता निर्माण तथा बाजार एवं वित्तीय संपर्क उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही ऋण सुविधा तक पहुंच बढ़ाने, संचालन दक्षता सुधारने तथा एफपीओ उद्यमों को विस्तार देने हेतु निरंतर सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
कार्यशाला में एफपीओ विकास तथा खरीफ तैयारी के विभिन्न एवं महत्वपूर्ण पहलुओं पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इनमें संस्थागत सहायता तंत्र, समन्वय के अवसर तथा एफपीओ को संसाधनों, बुनियादी ढांचे एवं संचालन विस्तार तक पहुंच दिलाने की रणनीतियों पर चर्चा हुई।
श्री अन्न के मूल्य संवर्धन पर आयोजित सत्रों में प्रतिभागियों को प्रसंस्करण तकनीकों एवं उद्यम विकास की जानकारी दी गई, जिससे प्राथमिक उत्पादन से आगे बढ़कर व्यवसाय उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने को प्रोत्साहन मिला। सुशासन पर हुई चर्चाओं में निदेशक मंडल की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही तथा दीर्घकालिक स्थिरता हेतु रणनीतिक निर्णय लेने की आवश्यकता रेखांकित की गई।

डॉ. के.सी. गुम्मागोलमठ, निदेशक (निगरानी एवं मूल्यांकन), राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (एमएएनएजीई), ने प्रभावी शासन ढांचे के महत्व पर अपना विचार साझा किया।
एफपीओ प्रगति समीक्षा और खरीफ कार्ययोजना पर समर्पित सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों ने वर्तमान प्रदर्शन का आकलन किया तथा स्थानीय परिस्थितियों तथा बाजार आवश्यकताओं के अनुरूप रणनीतियां तैयार कीं।
यह कार्यशाला एफपीओ नेताओं के लिए प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार पहुंच के नए अवसर तलाशने का भी मंच बनी, जिससे उनकी क्षमता मजबूत होगी और वे आत्मनिर्भर किसान संगठनों के रूप में विकसित हो सकेंगे।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, तेलंगाना)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें