कृषि शिक्षा संभाग

कृषि शिक्षा संभाग देश में उच्च कृषि शिक्षा के क्षेत्र में नियोजन, विकास समन्वयन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कार्य में संलग्न है। यह कार्य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, समतुल्य विश्वविद्यालयों, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय और कृषि संकाय वाले केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की भागीदारी और प्रयत्नों से कृषि उच्च शिक्षा को लगातार, उत्तरोत्तर गुणवत्ता और सार्थकता हेतु किया जाता है। इस संभाग के तहत राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबन्धन अकादमी (नार्म) हैदराबाद है। इसका कार्य अनुसंधान और शिक्षा नीति, नियोजन और प्रबन्धन में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पद्धति (नार्स) में क्षमता निर्माण कार्य मुहैया करना है।.

भा.कृ.अनु.प. मुख्यालय में स्थित इस संभाग के प्रमुख उपमहानिदेशक (शिक्षा) हैं और इसके 3 अनुभाग हैं- (1) मानव संसाधन विकास (2) शिक्षा नियोजन और विकास (3) शिक्षा गुणवत्ता सुनिश्चितता और सुधार और प्रत्येक अनुभाग के प्रमुख एक सहायक महानिदेशक हैं।

महत्वपूर्ण क्षेत्र

  • नीतिगत समर्थन, प्रत्यायन, शैक्षिक नियमन, वैयक्तिक नीतियों, पाठयक्रम की समीक्षा और डिलवरी पद्धति, बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का सृजन/सुदृढ़ीकरक करके विकासात्मक समर्थन, संकाय क्षमता में सुधार और अखिल भारतीय प्रतियोगिताओं के जरिये छात्रों का दाखिला आदि के जरिये देश में उच्च कृषि शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता की सुनिश्चितता प्रदान करना।
  • शिक्षा और अनुसंधान के महत्वपूर्ण क्षेत्र में नीतिगत समर्थन को बढ़ावा देकर, परीक्षण सीखने की सुविधा जुटाना ताकि छात्रों को ज्ञान, कौशल और व्यवहार संतुलित सम्मिश्रण मुहैया किया जा सके, और मांग आधारित भागीदारी और संबंधों के जरिये कृषि विश्वविद्यालयों में कार्यकुशलता और परिदृश्य को बढ़ाना।
  • राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में चेयर/पद के जरिये नेशनल प्रोफेसर, नेशनल फैलो, एमरिट्स वैज्ञानिक योजनाएं और छात्रों को स्कॉलरशिप और फैलोशिप के जरिये पुरस्कार और उत्कृष्ट अध्यापक पुरस्कार आदि द्वारा उत्कृष्टता और विशेषज्ञता को बढ़ावा देना।
  • राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पद्धति (नार्स) का क्षमता निर्माण करना इसमें नार्म और क्षमता निर्माण हेतु राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय संबंध बनाना है।

उपलब्धियां

  • कृषि शिक्षा में गुणवत्ता सुनिश्चितता हेतु प्रत्यायन मंडल की स्थापना की और 22 कृषि विश्वविद्यालयों का प्रत्यायन किया।
  • कृषि विश्वविद्यालयों में विशेष क्षेत्रों में नीतिगत सुदृढ़ता बढ़ाने हेतु 28 उत्कृष्टता के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को स्वीकृति प्रदान की गयी इसमें नयी और मौजूदा महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
  • स्नातक स्तर पर छात्रों को कौशल उन्मुख हस्त प्रशिक्षण देने के लिए सभी विश्वविद्यालयों में परीक्षण ज्ञान की 200 ईकाइयां स्थापित की गयीं हैं।
  • शैक्षिक सुविधाओं, ढांचागत सुविधाओं और संकाय सुधार को अद्यतन और सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, केन्द्रीय विश्वविद्यालयों और समतुल्य विश्वविद्यालयों को नियमित वित्तीय और प्रोफेशनल समर्थन दिया गया।
  • स्नातक स्तर पर कृषि विश्वविद्यालयों में लागू करने के लिए संशोधित पाठ्यक्रम को स्वीकृति प्रदान की गयी। इसमें कौशल निर्माण हेतु हस्त प्रशिक्षण और परीक्षण द्वारा सीखना शामिल हैं। इसे परिषद द्वारा गठित चौथी डीन समिति द्वारा संस्तुति प्रदान की गयी है।
  • छात्राओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में बालिका छात्रावास के निर्माण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की गयी। प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक बालिका छात्रावास की सुविधा प्रदान की गयी है।
  • राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों को शिक्षा देने के लिए 12 अन्तर्राष्ट्रीय छात्रावासों के निर्माण हेतु समर्थन दिया गया।
  • वित्तीय सहायता प्रदान करके स्नातक स्तर पर ग्रामीण जागरुकता कार्य अनुभव को बढ़ावा दिया गया।
  • शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और अन्तः प्रजनन में कमी लाने के लिए छात्रों के दाखिले के लिए नियमित परीक्षाओं का आयोजन किया गया। स्नातक स्तर पर 15% और स्नातकोत्तर स्तर पर 25% सीटों के लिए यह परीक्षा आयोजित की गयी। प्रति वर्ष लगभग 1350 मेधावी छात्रों का स्नातक कार्यक्रम में और 1600 छात्रों का स्नातकोत्तर कार्यक्रम में दाखिला होता है।
  • प्रति वर्ष महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 90 ग्रीष्म/शीत विद्यालयों के जरिए लगभग 2400 वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • मानव संसाधन विकास, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने और अन्तःप्रजनन को रोकने के लिए प्रति वर्ष स्नातक अध्ययन में 100 राष्ट्रीय मेधावी छात्रवृतियां, 275 कनिष्ठ अनुसंधान फैलोशिप स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए और पी एच डी के लिए 200 वरिष्ठ अनुसंधान फैलोशिप प्रदान की जाती हैं।
  • एडवांस अध्ययन के 31 केन्द्रों द्वारा संकाय क्षमता में सुधार किया गया।
  • विदेशी छात्रों को अवसर देकर विकासशील देशों में भारतीय उच्च कृषि शिक्षा को बढ़ावा दिया गया।
  • कृषि विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों को अद्यतन किया गया और इसमें साहित्य तक ऑन लाइन पहुंच के लिए नेटवर्क शामिल है।
  • भा.कृ.अनु.प. राष्ट्रीय प्रोफेसर और राष्ट्रीय फैलो योजनाओं के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया गया।
  • दसवीं योजना में विशेष क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए 100 उत्कृष्ट सेवामुक्त वैज्ञानिकों को भा.कृ.अनु.प. अवकाश वैज्ञानिक पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • सर्वश्रेष्ठ अध्यापक पुरस्कार द्वारा विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट अध्यापकों की पहचान की गयी।
  • सक्षम संकाय को शामिल करके विश्वविद्यालय स्तरीय पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन किया गया और ई-पाठ्य पुस्तकों और ई-सारांश को भी प्रोत्साहन दिया गया।
  • नार्म द्वारा राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पद्धति (नार्स) में आवश्यकता आधारित क्षमता निर्माण विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए किया गया इसमें फाउंडेशन कोर्स, रेफ्रेशर कोर्स, वर्कशाप और सेमिनार तथा अन्तर्राष्ट्रीय कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा नार्स के प्रदर्शन को बढ़ावा देने और भा.कृ.अनु.प. कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए नीतिगत समर्थन भी प्रदान किया।
  • अकाई के तहत सहयोग के 4 प्रमुख क्षेत्रों- (1) मानव संसाधन और संस्थागत क्षमता निर्माण (2) कृषि प्रसंस्करण और विपणन (3) उभरती प्रौद्योगिकी और (4) प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन के तहत सहयोगी अनुसंधान परियोजनाएं शुरू की गयी हैं। नॉर्मन बॉरलाग फैलोशिप और कोचरन फैलोशिप यू एस ए में प्रशिक्षण के लिए प्रदान की गयी और भारत एवं यूएसए में संयुक्त कार्यशालाओं का भी आयोजन किया गया।

संपर्क

डॉ नरेन्द्र सिंह राठौड़, उप महानिदेशक (शिक्षा)
शिक्षा संभाग, कृषि अनुसंधान भवन - II, नई दिल्ली - 110 012 भारत.
फोनः (कार्यालय) 91-11-25841760; फैक्सः 91-11-25843932 ई-मेलः ddgednaticar [dot] org [dot] in