भाकृअनुप-वीपीकेएएस में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और सतत कृषि पद्धतियों पर कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

भाकृअनुप-वीपीकेएएस में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और सतत कृषि पद्धतियों पर कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

1 जून, 2026, अल्मोड़ा

भाकृअनुप-विवेकानन्‍द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान (वीपीकेएएस) द्वारा 1 जून से 30 जून, 2026 के मध्‍य चल रहे ‘खेती बचाओ अभियान’ के अंतर्गत ग्राम लोहबा, बागेश्वर में एक कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन आज डॉ. लक्ष्‍मी कान्‍त, निदेशक, वीपीकेएएस के मार्गदर्शन में किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषकों को मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना था। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा उपस्थित कृषकों को हरी खाद, जैविक एवं जैव उर्वरकों के उपयोग के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

 

इसके साथ ही, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने पर विशेष बल दिया गया। इस अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में रासायनिक उर्वरकों पर कृषकों की अत्यधिक निर्भरता को कम करना तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना शामिल है। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने कृषकों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने तथा दैनिक भोजन में तेल का कम उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया।

इस कार्यक्रम के माध्यम से कृषकों को कृषि क्षेत्र से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे किसान क्रेडिट कार्ड तथा विभिन्न अनुदान योजनाओं आदि की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। वैज्ञानिकों ने कृषकों को कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया, ताकि प्रक्षेत्र की उत्पादकता में वृद्धि हो सके।

वैज्ञानिकों के बीच संवादात्मक कार्यक्रम के माध्यम से कृषकों ने अपने अनुभव, समस्याएं एवं जिज्ञासाएं साझा कीं। इस कार्यक्रम के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं सतत कृषि पद्धतियों के लिए प्रक्षेत्र स्तर पर जागरूकता बढ़ाने का एक सफल प्रयास किया गया।

कार्यक्रम का समन्‍वयन संस्‍थान के वैज्ञानिकों डॉ. अनुराधा भारती एवं डॉ. मनोज कुमार द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में क्षेत्र के कुल 16 कृषकों (11 पुरुष और 5 महिला कृषक) ने प्रतिभागिता की।

(स्रोतः भाकृअनुप-विवेकानन्‍द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान, अलमोड़ा)

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