21 जनवरी, 2026, अल्मोड़ा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, से प्राप्त निर्देशों एवं डॉ. लक्ष्मी कान्त, निदेशक, भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा, के दिशा-निर्देश में संस्थान द्वारा राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिवसीय (19 से 21 जनवरी 2026 तक) व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान के प्रशासनिक भवन स्थित श्रीमती गर्ट्यूड इमरसन सेन समिति कक्ष, हवालबाग में आयोजित हुआ।

राष्ट्रीय कर्मयोगी कार्यक्रम भारत सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को केवल पदधारी न मानकर उन्हें एक सजग, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित कर्मयोगी के रूप में विकसित करना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस का आरम्भ प्रतिभागियों के पंजीकरण एवं परिचय सत्र से आयोजित किया गया। जिसमें राष्ट्रीय कर्मयोगी की अवधारणा, उसके उद्देश्यों तथा अपेक्षित परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के चार खण्डों नामत: राष्ट्रीय कर्मयोगी कौन है, सफलता, संतुष्टि और परिपूर्णता की दृष्टि का विस्तार, कर्मयोगी क्षणों का निर्माण करना एवं राष्ट्र निर्माता के रूप में राष्ट्रीय कर्मयोगी में विभाजित था।

पहले मॉड्यूल में, ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी कौन है’ के अंतर्गत यह समझाया गया कि एक कर्मयोगी वह व्यक्ति है जो अपने कार्य को ईमानदारी, निष्ठा और पूर्ण समर्पण के साथ करता है तथा व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देता है। इस सत्र में प्रतिभागियों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया गया। दूसरे मॉड्यूल में, ‘सफलता, संतुष्टि और परिपूर्णता की दृष्टि का विस्तार’ विषय पर चर्चा की गई। इस सत्र में यह बताया गया कि वास्तविक सफलता केवल पद, वेतन या पदोन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्य से मिलने वाली आंतरिक संतुष्टि, समाज के लिए उपयोगिता और आत्मिक परिपूर्णता भी सफलता के महत्वपूर्ण आयाम हैं।
प्रशिक्षकों ने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि जब व्यक्ति अपने कार्य में उद्देश्य और अर्थ खोज लेता है, तब कार्य का बोझ आनंद में परिवर्तित हो जाता है। प्रतिभागियों ने इस सत्र को अत्यंत प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में ‘कर्मयोगी क्षणों का निर्माण’ विषय पर केंद्रित मॉड्यूल आयोजित किया गया।इसमें यह स्पष्ट किया गया कि छोटे-छोटे कार्यों में भी कर्मयोगी क्षण उत्पन्न किए जा सकते हैं, बशर्ते कार्य के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक और सेवा भाव से युक्त हो। कार्यालयीन कार्यप्रणाली, सहकर्मियों के साथ व्यवहार, हितधारकों के प्रति संवेदनशीलता और समयबद्ध कार्य निष्पादन जैसे विषयों पर व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से चर्चा की गई।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आईजीओपी (iGOT) ऐप के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निरंतर सीखने के महत्व पर बल दिया गया। यह स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय कर्मयोगी कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत सीखने और आत्म-विकास की प्रक्रिया है।
समापन सत्र में कार्यक्रम का सार प्रस्तुत किया गया और प्रतिभागियों से अपने अनुभव साझा करने का अनुरोध किया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी और आत्म-परिवर्तनकारी बताया।
संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक तथा कुशल सहायक वर्ग सहित संस्थान के दोनों कृषि विज्ञान केंद्रों (चिन्यालीसौड़ एवं काफलीगैर) एवं केन्द्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान, मुक्तेश्वर के कुल 98 कर्मियों ने इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया।
इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. पंकज कुमार मिश्रा, प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल ऑफिसर एच.आर.डी. तथा संचालन मास्टर ट्रेनर श्री राजेश कुमार खुल्बे, प्रधान वैज्ञानिक एवं श्री रविंद्र सिंह नेगी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी द्वारा किया गया।
(स्रोतः भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा)








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