8 जनवरी, 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप के कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), उजवा, नई दिल्ली, द्वारा आज क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (सीएफएलडी) कार्यक्रम के अंतर्गत सरसों फसल प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जनवरी एवं फरवरी माह में सरसों फसल हेतु अपनाई जाने वाली उन्नत कृषि तकनीकों, कीट-रोग प्रबंधन तथा सिंचाई प्रबंधन की जानकारी प्रदान करना था।
डॉ. डी.के. राणा, अध्यक्ष, ने अपने संबोधन में बताया कि रबी मौसम के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र, दिल्ली द्वारा दिल्ली देहात क्षेत्र में 125 किसानों के प्रक्षेत्र (50 हैक्टर) में क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किया गया हैं। इन प्रदर्शनों के अंतर्गत किसानों के खेतों में नवीनतम सरसों प्रजाति आर.एच.-1424 का प्रदर्शन शामिल है, जो तिलहनी फसलों के उत्पादन में वृद्धि करने एवं किसानों को नवीन तकनीकों से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होने वाला है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान, डॉ. समर पाल सिंह, विशेषज्ञ (सस्य विज्ञान) ने फसल की वर्तमान अवस्था को ध्यान में रखते हुए फली बनने की अवस्था पर दूसरी सिंचाई के महत्व पर विशेष बल दिया, जिससे दाना भराव बेहतर हो तथा उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी सलाह दी कि यदि पाले की संभावना हो, तो फसल को नुकसान से बचाने के लिए हल्की सिंचाई अवश्य करें। इसके साथ-साथ उन्होंने किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई एवं फसल की नियमित निगरानी जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी मार्गदर्शन दिया।

डॉ. बाबू लाल फगोडिया, विशेषज्ञ (पादप संरक्षण) ने सरसों फसल में लगने वाले प्रमुख कीट जैसे एफिड (माहू), आरा मक्खी, चितकबरा कीड़ा तथा रोगों जैसे आल्टरनेरिया ब्लाइट, मृदुरोमिल तुलासिता, सफेद रतुआ, सफेद चूर्णी रोग एवं तना गलन की पहचान, उनके समय पर प्रबंधन के उपाय तथा समन्वित कीट प्रबंधन (IPM) के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्री कैलाश, विशेषज्ञ (कृषि प्रसार) ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को अद्यतन वैज्ञानिक जानकारी एवं व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाने, सरसों फसल की उत्पादकता एवं लाभप्रदता बढ़ाने तथा उत्तम कृषि प्रबंधन पद्धतियों एवं नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा केन्द्र पर प्रदर्शित सरसों फसल का प्रत्यक्ष अवलोकन भी किया।
(स्रोतः भाकृअनुप के कृषि विज्ञान केन्द्र, उजवा, नई दिल्ली)








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