25 सितंबर, 2026, पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में प्रमुख कार्प बीज उत्पादन केंद्र रामसागर, बांकुड़ा में आज “आनुवंशिक रूप से उन्नत गुणवत्तापूर्ण मछली बीज: पश्चिम बंगाल में जलीय कृषि में परिवर्तन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन पीएमएमएसवाई-एनबीसी के तत्वावधान में पश्चिम बंगाल सरकार के मत्स्य विभाग के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का आयोजन रामसागर अंचल माछ डिमपोना उत्पादक प्राथमिक सहकारी समिति लिमिटेड, रामसागर, बांकुड़ा के परिसर में किया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में किया गया, जिनमें ओंडा के विधायक श्री अमरनाथ शाखा, पश्चिम बंगाल सरकार के मत्स्य विभाग के अधिकारी और भाकृअनुप-सिफा के वैज्ञानिक शामिल थे। उद्घाटन सत्र के दौरान सभी हितधारकों के लाभ के लिए जयंती रोहू, सिफा-अमृत कतला और सिफाब्रूड कार्प ब्रूडस्टॉक आहार पर एनबीसी संबंधी बंगाली विस्तार पुस्तिकाएं जारी की गईं।

भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठे पानी की जलीय कृषि संस्थान, भुवनेश्वर के निदेशक डॉ. पी.के. साहू ने अपने संबोधन में किसानों को लाभान्वित करने के लिए भाकृअनुप-सिफा और अन्य अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित नवीन प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने जलीय कृषि में वैज्ञानिक हस्तक्षेप अपनाने की वकालत की, जिसमें विशेष रूप से मछली रोग प्रबंधन पर जोर दिया गया।
डॉ. टी.के. घोषाल, प्रमुख, भाकृअनुप-सिफे कोलकाता केन्द्र, ने किसानों के कौशल उन्नयन पर जोर दिया। रामसागर अंचल माछ डिमपोना उत्पादक प्राथमिक सहकारी समिति लिमिटेड के सचिव श्री अतनु नंदी ने सभी सोसायटी सदस्यों/किसानों से भारत भर में उन्नत किस्मों सहित गुणवत्तापूर्ण मछली बीज की आपूर्ति के लिए वैज्ञानिक बीज उत्पादन प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया।
डॉ. किरण लाल दास, सहायक मत्स्य निदेशक, बांकुड़ा, ने भाकृअनुप के प्रयासों की सराहना की और रामसागर तथा पूरे पश्चिम बंगाल में गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों को व्यापक रूप से अपनाने पर जोर दिया।
पश्चिम बंगाल में “सीआईएफए-जीआई स्कैम्पी टीएम” के पालन के अवसरों को प्रस्तुत किया गया, साथ ही गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन के लिए सिफाब्रूड™ के लाभों का अवलोकन भी कराया गया। भाकृअनुप-सिफा के विशेषज्ञों ने तकनीकी व्याख्यान दिए और जैव-सुरक्षा, अंतःप्रजनन तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने से संबंधित प्रमुख चुनौतियों पर किसानों, हैचरी मालिकों और मत्स्य अधिकारियों के साथ संवाद किया। राज्य में उन्नत किस्मों के लाभों से संबंधित अनुभव भी साझा किए गए।

कार्यशाला ने वैज्ञानिकों, मत्स्य अधिकारियों, हैचरी संचालकों और मछली किसानों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया, जिससे पश्चिम बंगाल में सतत जलीय कृषि विकास के लिए आनुवंशिक रूप से उन्नत मछली बीज प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सुविधा मिली।
इंटरैक्टिव सत्र ने किसानों और वैज्ञानिकों को उन्नत मछली बीज उत्पादन तथा जलीय कृषि प्रथाओं से संबंधित क्षेत्र-स्तरीय मुद्दों, चुनौतियों और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया।
• प्रजातियों के विविधीकरण के लिए क्षेत्रीय ब्रूड बैंक स्थापित करना
• ब्रूडस्टॉक प्रमाणन और हैचरी प्रत्यायन को मजबूत करना
• रामसागर, पश्चिम बंगाल को कार्प मछली बीज क्लस्टर के रूप में विकसित करना
• किसानों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का विस्तार करना
• डिजिटल बीज ट्रेसेबिलिटी प्रणालियों को बढ़ावा देना
• बीज प्रसार के लिए सार्वजनिक–निजी भागीदारी को प्राथमिकता देना
रामसागर, बांकुड़ा और आसपास के जिलों के 220 से अधिक किसानों, हैचरी मालिकों और उद्यमियों ने कार्यशाला में भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठे पानी की जलीय कृषि संस्थान, कौसल्यागंगा, भुवनेश्वर)







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