भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर ने पश्चिम बंगाल में सामुदायिक भागीदारी आधारित नदी रैंचिंग पहल के माध्यम से गंगा पुनर्जीवन को आगे बढ़ाया

भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर ने पश्चिम बंगाल में सामुदायिक भागीदारी आधारित नदी रैंचिंग पहल के माध्यम से गंगा पुनर्जीवन को आगे बढ़ाया

26 मई, 2026, बैरकपुर

नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत गंगा नदी के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई), बैरकपुर, ने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में गंगा नदी के बलागढ़–सोमरा बाजार क्षेत्र में राष्ट्रीय नदी रैंचिंग कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य घटती हुई मत्स्य संपदा की पुनःपूर्ति, देशी मछली विविधता का संरक्षण तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से नदी पारितंत्र को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, की उपस्थिति में किया गया।

ICAR-CIFRI, Barrackpore advances Ganga rejuvenation with community-led river ranching initiative in West Bengal

स्थानीय समुदाय को संबोधित करते हुए डॉ. प्रदीप डे ने गंगा नदी के पुनर्जीवन में सामुदायिक संरक्षकता, सतत मत्स्य पालन तथा प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देशी मछली आबादी की बहाली तथा जलीय जैव विविधता का संरक्षण ब्लू इकोनॉमी को सुदृढ़ करने, आजीविका बढ़ाने तथा पारिस्थितिक लचीलेपन को प्रोत्साहित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ. डे ने आगे कहा कि विज्ञान, जनभागीदारी और संस्थागत सहयोग के माध्यम से निरंतर समर्थन गंगा के भविष्य को सुरक्षित करने तथा समावेशी एवं सतत नदी विकास के माध्यम से विकसित भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है।

सहभागी संरक्षण के एक सशक्त उदाहरण के रूप में, आसपास के समुदायों की महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी सहित 35 से अधिक स्थानीय मछुआरों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। लगभग 203 किलोग्राम वजन की हैचरी में उत्पादित 33,500 मछली अंगुलिकाओं (फिंगरलिंग्स) को गंगा नदी में छोड़ा गया। रैंचिंग स्टॉक में भारतीय प्रमुख कार्प प्रजातियाँ—रोहू, कतला और मृगल—के साथ बाटा मछली भी शामिल थी, जिसका उद्देश्य देशी मछली आबादी की बहाली तथा जलीय जैव विविधता को बढ़ावा देना था।

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यह पहल राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के अंतर्गत भाकृअनुप-सीआईएफआरआई के व्यापक नदी पुनर्स्थापन प्रयासों का हिस्सा है, जिसके माध्यम से संस्थान पहले ही विभिन्न भारतीय राज्यों में एक करोड़ से अधिक मछली अंगुलिकाओं का ऐतिहासिक विसर्जन कर चुका है, जिससे नदी पारितंत्र की पुनर्बहाली में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

इस कार्यक्रम को स्थानीय मछुआरों का उत्साहपूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ, जिन्होंने मछलियों की उपलब्धता बढ़ाने, आजीविका को सुदृढ़ करने तथा गंगा पारितंत्र की समृद्ध देशी मत्स्य विरासत की रक्षा के लिए भाकृअनुप-सीआईएफआरआई के निरंतर प्रयासों की सराहना की।

यह कार्यक्रम भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के तत्वावधान में कार्यान्वित किया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)

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