खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत जारी गतिविधियों के तहत, भाकृअनुप–फ्लोरीकल्चर अनुसंधान निदेशालय (डीएफआर), पुणे के वैज्ञानिकों की एक बहु-विषयक टीम ने पुणे जिले के शिकरापुर स्थित जाठेगांव गांव में अच्छी एवं सतत कृषि पद्धतियों के साथ गुलाब की जैव-सघन संरक्षित खेती पर एक जागरूकता एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया।
जाठेगांव गांव में गुलाब की संरक्षित खेती की लगभग 20 इकाइयां हैं, जिनमें से प्रत्येक का क्षेत्रफल लगभग 1 से 2 एकड़ है। भ्रमण के दौरान टीम ने गुलाब उत्पादकों के साथ संवाद किया तथा पॉलीहाउस इकाइयों में प्रचलित खेती पद्धतियों का आकलन किया। संरक्षित परिस्थितियों में सतत गुलाब उत्पादन के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम तथा दो स्थल-आधारित प्रदर्शन आयोजित किए गए।
वैज्ञानिकों ने फर्टिगेशन के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया तथा किसानों को सलाह दी कि वे मृदा एवं पौधों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जैव उर्वरकों, सूक्ष्मजीवी संघों (Microbial Consortia) तथा जैव-उत्तेजकों (Biostimulants) के प्रयोग की आवृत्ति को सप्ताह में एक बार से बढ़ाकर दो बार करें। नवस्थापित गुलाब पॉलीहाउसों के भ्रमण के बाद वैज्ञानिकों ने एकीकृत पादप स्वास्थ्य प्रबंधन (IPHM) रणनीतियों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया, जिसमें विशेष रूप से क्राउन गॉल एवं थ्रिप्स जैसे कीटों एवं रोगों की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित किया गया।

किसानों को मृदा उर्वरता एवं पौधों की स्फूर्ति बढ़ाने में सूक्ष्मजीवी संघों की लाभकारी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही भाकृअनुप संस्थानों में उपलब्ध उपयुक्त सूक्ष्मजीवी संघों का विवरण तथा संबंधित संपर्क जानकारी भी साझा की गई, ताकि किसान उन्हें आसानी से अपना सकें।
पॉलीहाउस परिस्थितियों में कीट प्रबंधन हेतु नीले चिपचिपे ट्रैप की स्थापना एवं उचित स्थान निर्धारण पर श्री रेवनाथ के पॉलीहाउस में एक स्थल-आधारित प्रदर्शन आयोजित किया गया। किसानों को प्रभावी कीट निगरानी एवं प्रबंधन के लिए अपने-अपने पॉलीहाउसों में पीले तथा नीले दोनों प्रकार के चिपचिपे ट्रैप लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
विभिन्न संरक्षित खेती इकाइयों का भ्रमण कर खेती पद्धतियों एवं उत्पाद की गुणवत्ता की तुलना करते हुए अच्छी कृषि पद्धतियों (जीएपीएस) का जीवंत प्रदर्शन किया गया, जिसमें स्वच्छ खेती एवं पॉलीहाउस के उचित रखरखाव पर विशेष जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियां किस प्रकार बेहतर उत्पादकता एवं आर्थिक लाभ सुनिश्चित करती हैं।

इसके अतिरिक्त, श्री श्रीकांत वाखचोरे के खेत पर पोल्ट्री आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली तथा पॉलीहाउसों में पोल्ट्री अपशिष्ट के जैविक खाद के रूप में उपयोग की संभावनाओं का प्रदर्शन किया गया। उनके पॉलीहाउस में गुलाब की वृद्धि एवं उत्पादकता पर जैव-उत्तेजकों के सकारात्मक प्रभाव को भी प्रदर्शित किया गया।
वैज्ञानिकों ने किसानों को सामूहिक विकास एवं बेहतर विपणन अवसरों के लिए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने हेतु प्रोत्साहित किया। संरक्षित खेती एवं कृषि गतिविधियों को समर्थन देने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। किसानों ने पॉलीहाउस अवसंरचना की स्थापना में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) द्वारा प्रदान किए गए सहयोग की सराहना की।
(स्रोत: भाकृअनुप–फ्लोरीकल्चर अनुसंधान निदेशालय, पुणे)







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