ओएडीएमपी के तहत जलवायु-सहिष्णु हस्तक्षेपों को मजबूत करने हेतु ओडिशा में किसानों से संवाद करते भाकृअनुप-क्रिडा के वैज्ञानिक

ओएडीएमपी के तहत जलवायु-सहिष्णु हस्तक्षेपों को मजबूत करने हेतु ओडिशा में किसानों से संवाद करते भाकृअनुप-क्रिडा के वैज्ञानिक

23–24 मार्च, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, के वैज्ञानिकों की एक टीम ने 23–24 मार्च, 2026 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के सूखा-प्रवण रारुआं ब्लॉक में किसानों के साथ गहन क्षेत्रीय संवाद किया। यह गतिविधि ओडिशा कृषि सूखा न्यूनीकरण कार्यक्रम (ओएडीएमपी) के अंतर्गत संचालित की गई।

यह पहल राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष तथा भुवनेश्वर स्थित कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से संचालित की गई, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर की चुनौतियों का आकलन करना और सूखा न्यूनीकरण तथा सतत आजीविका के लिए स्थान-विशिष्ट रणनीतियों की पहचान करना था।

ICAR-CRIDA Scientists Engage with Farmers in Odisha to Strengthen Climate-Resilient Interventions under OADMP

23 मार्च 2026 को कार्यक्रम के तहत गोडापलासा ग्राम पंचायत के 12 गांवों—बड़ामेंटा, पंचुडाला, गोडापलासा, बिसिडिया, धांगिडिपोसी, पुरुनिया, टिंगरिया, कुलुंडी, सनापलासा, ब्रुंडेइपोसी, पनासी और भरदापासी—में फोकस ग्रुप डिस्कशन (एफजीडी) आयोजित किया गया। एक संरचित प्रश्नावली के माध्यम से टीम ने प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, फसल प्रणाली, पशुपालन एकीकरण, कृषि वानिकी, कृषि यंत्रीकरण तथा मृदा स्वास्थ्य से संबंधित आधारभूत जानकारी एकत्र की। किसानों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने अनुभवों, समस्याओं तथा स्थानीय कृषि अधिकारियों के साथ अपने विचार साझा किए।

24 मार्च, 2026 को वैज्ञानिकों ने पांच चयनित गांवों—पनासी और पंचुडाला (गोडापलासा जीपी), ताकुडिपाला (भांजकिया जीपी), तथा पपड़ा और रेटीसाही (तिलोकोटी जीपी)—में विस्तृत ट्रांसेक्ट वॉक की। ऊपरी, मध्य और निचले भू-भागों को शामिल करते हुए इस अभ्यास से कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की समग्र समझ विकसित हुई, जिसमें मृदा विविधता, जल प्रवाह की गतिशीलता, संसाधन उपयोग पैटर्न तथा महत्वपूर्ण हस्तक्षेप बिंदुओं की पहचान की गई।

ICAR-CRIDA Scientists Engage with Farmers in Odisha to Strengthen Climate-Resilient Interventions under OADMP

वैज्ञानिकों ने जशिपुर स्थित जिला कृषि कार्यालय का भी दौरा किया और अधिकारियों के साथ चर्चा की। इस संवाद में संस्थागत समन्वय को सुदृढ़ करने तथा कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के समन्वय पर विशेष ध्यान दिया गया।

यह क्षेत्रीय पहल ओडिशा के सूखा-प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप लक्षित और जलवायु-सहिष्णु रणनीतियों के विकास में सहायक सिद्ध होगी।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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