“लोगों और पृथ्वी के लिए मधुमक्खियों के साथ होना”: भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे में विश्व मधुमक्खी दिवस 2026 का आयोजन

“लोगों और पृथ्वी के लिए मधुमक्खियों के साथ होना”: भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे में विश्व मधुमक्खी दिवस 2026 का आयोजन

20 मई, 2026, पुणे

भाकृअनुप–पुष्पोत्पादन अनुसंधान निदेशालय, पुणे, ने आज विश्व मधुमक्खी दिवस 2026 का आयोजन ज़ूम मंच के माध्यम से लोगों और पृथ्वी के लिए मधुमक्खियों के साथ होना विषय के अंतर्गत किया। कार्यक्रम का उद्देश्य परागण, जैव विविधता संरक्षण, खाद्य संप्रभुता तथा हरित आर्थिक विकास में मधुमक्खियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना था।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में निदेशालय के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं तथा परागणकर्ता संरक्षण के क्षेत्र में संस्थान की पहलों एवं उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण और टिकाऊ कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के विकास हेतु निदेशालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

ICAR-DFR, Pune Celebrates World Bee Day 2026: Bee Together for People and the Planet

कार्यक्रम में “लोगों और धरती के लिए साथ मिलकर काम करें: परागण संप्रभुता, खाद्य संप्रभुता तथा हरित आर्थिक विकास के लिए मधुमक्खियों के आवास और जीवंत फूलों के नज़ारों को फिर से बनाना” विषय पर एक विशेष आमंत्रित व्याख्यान आयोजित किया गया। वक्ता ने मधुमक्खियों के आवासों के पुनर्स्थापन तथा टिकाऊ पुष्पीय परिदृश्यों के निर्माण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह परागणकर्ताओं के संरक्षण, पारिस्थितिकीय लचीलेपन, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ICAR-DFR, Pune Celebrates World Bee Day 2026: Bee Together for People and the Planet

इस ऑनलाइन कार्यक्रम में देशभर से शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों, विस्तार कर्मियों तथा विभिन्न हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ज़ूम प्लेटफॉर्म पर लगभग 100 स्क्रीन के माध्यम से कुल 170 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की, जो कार्यक्रम की व्यापक पहुँच और सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

कार्यक्रम का समापन डॉ. के. वी. प्रसाद, निदेशक, भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे के समापन संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि परागणकर्ताओं के संरक्षण तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को सुदृढ़ करने हेतु सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

(स्रोत: भाकृअनुप–पुष्पोत्पादन अनुसंधान निदेशालय, पुणे)

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