17 अप्रैल, 2026, गोवा
भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान को आज डॉ. उदयसिंह श्रीकांत रावराणे के संस्थान दौरे के अवसर पर मेजबानी करने का अवसर प्राप्त हुआ।

डॉ. रावोराणे ने वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के साथ संवाद किया तथा संस्थान के बहुविषयक दृष्टिकोण और किसानों एवं हितधारकों के लिए अनुसंधान को प्रभावी तकनीकों में बदलने की भूमिका की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिक नवाचारों को सुशासन और जनसेवा वितरण प्रणाली से जोड़ने के महत्व पर बल दिया।
इसके पश्चात उन्होंने संस्थान की विभिन्न प्रायोगिक इकाइयों का भ्रमण किया, जिनमें नारियल आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) मॉडल, बायोमास रीसाइक्लिंग इकाइयाँ, पशुधन इकाइयाँ, एलडब्ल्यूवीएस एवं जीवामृत उत्पादन तकनीक इकाइयाँ, नक्षत्र–राशि–नवग्रह वाटिका, तथा एग्रो-ईकोटूरिज्म (एईटी) हट शामिल थे।

डॉ. परवीन कुमार ने इस अवसर पर भारतीय कृषि की समग्र रूपरेखा प्रस्तुत की।
यह दौरा तटीय क्षेत्रों में वितरण-केन्द्रित, सतत एवं सामाजिक प्रभाव वाली वैज्ञानिक प्रगति के प्रति आईसीएआर-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)







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