16 जुलाई, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा), हैदराबाद, ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के 98वें स्थापना दिवस को विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया, जिनमें राष्ट्रीय स्थापना दिवस समारोह का लाइव वेबकास्ट, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण अभियान तथा किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम शामिल थे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थान ने सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और किसान संपर्क के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर को भारत के कृषि परिवर्तन का अग्रदूत बताया और खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध तथा मत्स्य उत्पादन में देश की उल्लेखनीय उपलब्धियों का श्रेय संस्थान के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचारों को दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे अनुसंधान को कृषि समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाते हुए प्रयोगशालाओं से किसानों के खेतों तक प्रौद्योगिकियों का समयबद्ध हस्तांतरण सुनिश्चित करें। समारोह की शुरुआत नई दिल्ली से आयोजित 98वें आईसीएआर स्थापना दिवस कार्यक्रम के लाइव वेबकास्ट से हुई, जिसमें आईसीएआर-सीआरआईडीए के कर्मचारी शामिल हुए।

राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान, डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, ने कहा कि विज्ञान-आधारित अनुसंधान और नवाचार भारत के कृषि परिवर्तन को गति दे रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले एक वर्ष में भाकृअनुप ने 386 उन्नत फसल किस्में विकसित की हैं, जिनमें से 94 प्रतिशत जलवायु-सहिष्णु हैं, साथ ही 117 बागवानी किस्में भी विकसित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, पशु स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती, कृषि यंत्रीकरण और जलवायु-अनुकूल कृषि के क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण प्रगति की गई है। उन्होंने विज्ञान-आधारित, मांग-उन्मुख और सतत कृषि परिवर्तन के माध्यम से समृद्ध कृषक समुदाय, स्वस्थ समाज, स्वच्छ पर्यावरण तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति भाकृअनुप की प्रतिबद्धता को दोहराया।
समारोह के अंतर्गत, कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), भाकृअनुप-सीआरआईडीए ने भुवन अनुसंधान फार्म में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना, हरित आवरण में वृद्धि करना तथा कर्मचारियों और कृषक समुदाय के बीच सतत जीवनशैली को प्रोत्साहित करना था। इस दौरान कुल 36 पौधे लगाए गए, जो संस्थान की पारिस्थितिक संरक्षण और सतत कृषि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
वृक्षारोपण अभियान में विषय विशेषज्ञों, तकनीकी अधिकारियों, प्रशासनिक कर्मचारियों, भुवन अनुसंधान फार्म, हयातनगर के कार्मिकों तथा ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWEP) कार्यक्रम के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

वृक्षारोपण कार्यक्रम के पश्चात, भाकृअनुप-सीआरआईडीए केवीके टीम ने मंचल मंडल के अरुटला गांव में किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें किसानों को आईसीएआर के इतिहास, उपलब्धियों तथा कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और किसान कल्याण में उसके योगदान के बारे में जानकारी दी गई। एल नीनो (El Niño) पर आयोजित एक संवादात्मक सत्र में वर्षा, फसल उत्पादन और जल उपलब्धता पर इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई, जबकि विशेषज्ञों ने इसके प्रतिकूल प्रभावों को कम करने हेतु जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम का समापन जलवायु-स्मार्ट कृषि रणनीतियों पर सक्रिय चर्चा के साथ हुआ। इसमें अरुटला गांव के 46 किसानों, जिनमें 31 पुरुष और 15 महिलाएं शामिल थीं, ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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