भाकृअनुप-प्रायोजित 10 दिवसीय लघु पाठ्यक्रम का भाकृअनुप–एनआईएचएसएडी, भोपाल में संपन्न

भाकृअनुप-प्रायोजित 10 दिवसीय लघु पाठ्यक्रम का भाकृअनुप–एनआईएचएसएडी, भोपाल में संपन्न

18 मार्च, 2026, भोपाल

भाकृअनुप-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान, भोपाल द्वारा 9–18 मार्च, 2026 के दौरान आयोजित “संक्रामक रोगों के लिए अगली पीढ़ी के डायग्नोस्टिक्स और वैक्सीन: तर्कसंगत डिजाइन से व्यवसायीकरण तक” विषय पर 10 दिवसीय लघु पाठ्यक्रम आज सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

डॉ. अनिकेत सान्याल, निदेशक, भाकृअनुप–राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान, ने उन्नत निदान प्लेटफॉर्म और आधुनिक वैक्सीन तकनीकों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया, जो अधिक संवेदनशीलता, विशिष्टता, सुरक्षा और विस्तार क्षमता प्रदान करें। उन्होंने विशेष रूप से सीमा पार (ट्रांसबाउंड्री) और जूनोटिक रोगजनकों के उभरने और पुनः उभरने की स्थिति में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

ICAR-sponsored 10-day short course concludes at ICAR-NIHSAD, Bhopal

इस पाठ्यक्रम में उन्नत वैक्सीन प्लेटफॉर्म और तकनीकों को शामिल किया गया, जैसे डीआईवीए-सक्षम जीवित-क्षीणित वैक्सीन, ट्रांस-एम्प्लीफाइंग mRNA वैक्सीन, वायरस-लाइक पार्टिकल्स रणनीतियाँ, वीएसवी-आधारित वैक्सीन प्लेटफॉर्म तथा इन्फ्लूएंजा वैक्सीन विकास के लिए रिवर्स जेनेटिक्स सिस्टम। इसके साथ ही अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स तकनीकों—जैसे सिंथेटिक बायोलॉजी आधारित प्लेटफॉर्म, सीआरआईएसपीआर-आधारित डिटेक्शन तथा माइक्रोफ्लूडिक्स—पर भी चर्चा की गई।

प्रतिभागियों को इन्फ्लूएंजा वायरस के रेस्क्यू, बैकुलोवायरस सिस्टम द्वारा रिकॉम्बिनेंट प्रोटीन अभिव्यक्ति, लिपिड और स्वर्ण (गोल्ड) नैनोपार्टिकल्स का संश्लेषण एवं विश्लेषण के साथ-साथ SARS-CoV-2 के लिए उच्च-थ्रूपुट माइक्रो-न्यूट्रलाइजेशन जैसे उन्नत तकनीकों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

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इसके अतिरिक्त, पाठ्यक्रम में तकनीकी हस्तांतरण, पेटेंट रणनीतियाँ, स्टार्ट-अप अवसर और व्यावसायीकरण के मार्गों पर व्याख्यानों के माध्यम से ट्रांसलेशनल रिसर्च की अवधारणाओं से भी परिचित कराया गया। यह पाठ्यक्रम अगली पीढ़ी के डायग्नोस्टिक्स और वैक्सीन विकास के क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए एक उत्कृष्ट मंच साबित हुआ।

इस कार्यक्रम में देश के आठ राज्यों से 14 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो पशु चिकित्सा सूक्ष्म जीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, शरीर क्रिया विज्ञान, जैव रसायन, पशु चिकित्सा, महामारी विज्ञान और परजीविविज्ञान जैसे विविध विषयों का प्रतिनिधित्व करते थे।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान, भोपाल)

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