देश हमें देता है सब कुछ; हम भी तो कुछ देना सीखें”: श्री शिवराज सिंह चौहान
“मिट्टी बचाएंगे तो भविष्य बचाएंगे”: श्री चौहान
15 जुलाई 2026, नई दिल्ली
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड (AgIn) के सहयोग से आज नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में “कृषि परिवर्तन के लिए साझेदारी: सतत कृषि भविष्य के लिए सीएआर को संगठित करना” विषय के अंतर्गत भाकृअनुप टेक्नोलॉजी पोर्टफोलियो फॉर कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया।
कॉन्क्लेव में 75 से अधिक कॉरपोरेट्स, उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधियों और परोपकारी संगठनों के 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान भाकृअनुप के मिशन और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप सतत कृषि विकास के लिए सीएसआर-आधारित साझेदारियों की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
वर्ष 2026 में उच्च प्रभाव वाले सीएसआर हस्तक्षेपों के लिए पांच प्राथमिकता वाले विषयों की पहचान की गई है:
•भारतीय कृषि को जलवायु-अनुकूल बनाना;
• प्रकृति-आधारित समाधानों और फसल विविधीकरण के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य में सुधार;
• स्वास्थ्य के लिए कृषि;
• कृषि कौशल विकास; और
• कृषि एवं विस्तार में महिलाएं
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी और श्री रामनाथ ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “देश हमें देता है सब कुछ; हम भी तो कुछ देना सीखें,” और इस बात पर जोर दिया कि सीएसआर केवल एक कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त माध्यम है। महात्मा गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिनके पास अधिक संसाधन हैं, उनकी समाज के कल्याण में योगदान देने की नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने किसानों को समय पर लाभ सुनिश्चित करने के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी के माध्यम से भाकृअनुप की प्रौद्योगिकियों के तेजी से व्यावसायीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। जूट क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार मशीनीकरण उत्पादकता, उत्पाद की गुणवत्ता और किसानों की आय में सुधार कर रहा है।
केन्द्रीय मंत्री ने जलवायु-अनुकूल कृषि, मृदा स्वास्थ्य, कृषि स्टार्टअप्स, युवाओं के कौशल विकास, खाद्य प्रसंस्करण और महिला किसानों के सशक्तिकरण में अधिक सीएसआर निवेश का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 46 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और ऐसे निवेश नवाचार को गति देंगे, ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा करेंगे तथा सतत विकास को बढ़ावा देंगे।
“मिट्टी बचाएंगे तो भविष्य बचाएंगे,” कहते हुए श्री चौहान ने मानव कल्याण के लिए मृदा स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया और कॉरपोरेट क्षेत्र से सीएसआर को विकसित भारत के निर्माण और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के रूप में देखने का आग्रह किया।
अपने संबोधन में श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था एवं ग्रामीण समृद्धि की आधारशिला है तथा सतत कृषि विकास के एक प्रमुख प्रेरक के रूप में सीएसआर की भूमिका को रेखांकित किया। कृषि विभाग के साथ साझेदारी के लिए कॉरपोरेट क्षेत्र की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोग से नवाचार, प्रौद्योगिकी अपनाने और किसानों के लिए प्रभावी हस्तक्षेपों को गति मिलेगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों के कल्याण और कृषि के सतत विकास के लिए नीति, विज्ञान और जनभागीदारी के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। वैज्ञानिकों, अधिकारियों तथा कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए श्री चौधरी ने सभी हितधारकों से समृद्ध और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण तथा देश के कृषि परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए इस सामूहिक प्रयास को और मजबूत करने का आग्रह किया।
श्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि कृषि भारत की आत्मा और ग्रामीण समृद्धि की आधारशिला है। उन्होंने किसानों के कल्याण, कृषि नवाचार और आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने को आगे बढ़ाने के लिए सार्वजनिक संस्थानों और कॉरपोरेट क्षेत्र के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, जलवायु-अनुकूल कृषि, नवाचार एवं किसान सशक्तिकरण में परिवर्तनकारी हस्तक्षेपों के लिए सीएसआ को एक उत्प्रेरक के रूप में रेखांकित किया। केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में किसानों की चिंताओं के समाधान के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के समर्पित प्रयासों की सराहना करते हुए श्री ठाकुर ने भारत के लिए एक सतत, आधुनिक और समृद्ध कृषि भविष्य के निर्माण हेतु सभी हितधारकों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया।
भाकृअनुप टेक्नोलॉजी पोर्टफोलियो फॉर कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, डॉ. एम. एल. जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, ने भारतीय कृषि को आगे बढ़ाने में विज्ञान की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला और कृषि-खाद्य प्रणाली की बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत साझेदारियों का आह्वान किया।
डिस्कवरी-टू-डिलीवरी कंटिन्यूम को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने प्रौद्योगिकियों के प्रसार और सतत कृषि परिवर्तन को गति देने के लिए अनुसंधान संस्थानों, उद्योग तथा अन्य हितधारकों के बीच अधिक समन्वय की वकालत की। उन्होंने कहा कि कृषि का भविष्य संपूर्ण कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने में निहित है, जो उत्पादन से आगे बढ़कर उत्पादन-पूर्व और उत्पादन-पश्चात हस्तक्षेपों तक विस्तृत है।
कार्यक्रम में सह-वित्तपोषण मॉडल, प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण, कार्यक्रम कार्यान्वयन और दीर्घकालिक साझेदारियों पर मुख्य सत्र, विषयगत पैनल चर्चाएं, राउंडटेबल तथा बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) और बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (B2G) बैठकें आयोजित की गईं।
भाकृअनुप की 75 से अधिक प्रौद्योगिकियों, नवाचारों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और प्रमुख कार्यक्रमों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी ने उद्योग और सीएसआर हितधारकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी में व्यावसायीकरण और बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए तैयार प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही कृषि अनुसंधान, जलवायु-अनुकूल खेती, प्रौद्योगिकी प्रसार, क्षमता निर्माण, ग्रामीण उद्यमिता और सतत आजीविका संवर्धन के क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को भी प्रस्तुत किया गया।
यह कॉन्क्लेव हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता में आयोजित चार क्षेत्रीय सीएसआर रोडशो की श्रृंखला को आगे बढ़ाता है, जिनमें उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स, परोपकारी संगठनों और नागरिक समाज के 500 से अधिक हितधारकों ने सामूहिक रूप से भाग लिया।
कॉन्क्लेव का उद्देश्य कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) साझेदारियों, संसाधनों के अभिसरण और मजबूत सार्वजनिक-निजी सहयोग के माध्यम से भाकृअनुप की किसान-केन्द्रित प्रौद्योगिकियों को अपनाने की गति तेज करना है। इसका उद्देश्य प्राथमिकता वाले कृषि कार्यक्रमों के लिए सीएसआर निवेश जुटाना, बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले बहु-हितधारक पहलों को बढ़ावा देना, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना तथा समावेशी और सतत ग्रामीण विकास के लिए नई सीएसआर-समर्थित परियोजनाओं को सुगम बनाना है।
भाकृअनुप की वाणिज्यिक शाखा के रूप में एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड (AgIn), सीएसआर साझेदारियों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी। यह सीएसआर के लिए तैयार परियोजनाओं को सुगम बनाने, रणनीतिक साझेदारियां स्थापित करने, कार्यान्वयन में सहयोग करने तथा पारदर्शिता और प्रभाव आकलन सुनिश्चित करने का कार्य करेगी, जिससे कृषि नवाचारों को बड़े पैमाने पर विस्तारित किया जा सके और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ बनाया जा सके।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसार) के माध्यम से भाकृअनुप -उद्योग साझेदारी को मजबूत करने के संबंध में अपने विचार साझा किए, ताकि नवाचार, प्रौद्योगिकी अपनाने और सतत कृषि विकास को गति दी जा सके।
कॉन्क्लेव के दौरान 10 उद्योग भागीदारों के प्रतिनिधियों ने भाकृअनुप की प्रौद्योगिकियों और पहलों के लिए सीएसआर वित्तपोषण की प्रतिबद्धताओं की घोषणा की, जबकि भाग लेने वाली अन्य कंपनियों ने भविष्य में सीएसआर सहयोग के माध्यम से भाकृअनुप के प्रयासों को समर्थन देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भाकृअनुप 16 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में अपना 98वां स्थापना दिवस मनाएगा। समारोह में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार के क्षेत्र में परिषद की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा, भारतीय कृषि में उत्कृष्ट योगदानों को सम्मानित किया जाएगा तथा खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, किसानों की आय बढ़ाने और विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने के लिए विज्ञान-आधारित, जलवायु-अनुकूल और किसान-केन्द्रित कृषि विकास के प्रति भाकृअनुप की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया जाएगा।







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