25 जून, 2026, हैदराबाद
आयोजन–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा), हैदराबाद ने आज तेलंगाना के महबूबनगर जिले के नवाबपेट मंडल के इप्पातुर गांव में 'खेत बचाओ अभियान 2026' के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह अभियान भारत सरकार और भाकृअनुप की राष्ट्रव्यापी पहल के अंतर्गत संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरीकरण, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तथा सतत फसल उत्पादन के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था। वैज्ञानिकों ने इस बात पर जोर दिया कि यूरिया का अत्यधिक और अंधाधुंध उपयोग मृदा की उर्वरता, फसल उत्पादकता तथा कृषि लाभप्रदता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि मृदा स्वास्थ्य में सुधार हो और अधिक उत्पादकता प्राप्त की जा सके। अभियान के अंतर्गत वैज्ञानिकों ने बीज उपचार तकनीकों का भी प्रदर्शन किया तथा बीज अंकुरण में सुधार, मृदा जनित रोगों से फसलों की सुरक्षा तथा बेहतर फसल स्थापना में उनके महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में ग्राम सरपंच श्री रवि किरण तथा उपसरपंच श्री नरसिम्हा भी उपस्थित रहे। उन्होंने जमीनी स्तर पर सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर-क्रिडा के प्रयासों की सराहना की। इस अभियान ने वैज्ञानिक ज्ञान के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने, मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण तथा दीर्घकालिक कृषि समृद्धि के लिए पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के प्रति आईसीएआर-क्रिडा की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
कार्यक्रम में कुल 75 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें 45 महिला किसान शामिल थीं।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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