भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद द्वारा तेलंगाना राज्य के यादाद्री-भुवनगिरि जिले के पोचमपल्ली मंडल में खेत बचाओ अभियान 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का आयोजन

भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद द्वारा तेलंगाना राज्य के यादाद्री-भुवनगिरि जिले के पोचमपल्ली मंडल में खेत बचाओ अभियान 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का आयोजन

3 जून, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा), हैदराबाद, भारत सरकार तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के आह्वान के प्रत्युत्तर में किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खेत बचाओ अभियान 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का आयोजन कर रहा है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत भाकृअनुप- क्रिडा, हैदराबाद द्वारा 3 जून, 2026 को तेलंगाना राज्य के यादाद्री-भुवनगिरि जिले के पोचमपल्ली मंडल के जुलूर गांव में संतुलित उर्वरीकरण उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन विषय पर एक जागरूकता अभियान आयोजित किया गया।

किसानों को सतत फसल उत्पादन के लिए मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरीकरण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें यूरिया के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी गई, क्योंकि इससे मृदा स्वास्थ्य, फसल उत्पादकता तथा कृषि लाभप्रदता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

ICAR-CRIDA, Hyderabad Organizes Save the Field Campaign 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) at Pochampalli mandal in Yadadri -Bhuvanagiri district of Telangana state

प्रतिभागियों को मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रयोग के महत्व के बारे में जागरूक किया गया तथा उन्हें उचित मृदा नमूना संग्रहण तकनीकों के बारे में मार्गदर्शन दिया गया। किसानों को धान की रोपाई से पूर्व सनई (Sunhemp) तथा ढैंचा (Dhaincha) जैसी हरी खाद फसलों की खेती करने की सलाह दी गई, क्योंकि इस क्षेत्र में धान प्रमुख फसल के रूप में उगाई जाती है।

चर्चा के दौरान फसल अवशेषों को जलाने की प्रथा को समाप्त करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया तथा अवशेषों के समावेशन एवं उपयोग से उर्वरकों की आवश्यकता में कमी लाने और मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लाभों पर प्रकाश डाला गया। जल संरक्षण रणनीतियों तथा ऊर्जा के कुशल उपयोग हेतु उपयुक्त यंत्रीकरण प्रथाओं को अपनाने पर एक संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया।

विशेषज्ञों ने जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों के उपयोग के बारे में जानकारी दी तथा जैविक खेती की विधियों के प्रति जागरूकता उत्पन्न की। उन्होंने कीट पहचान के लिए डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा बाजार संबंधी नवीनतम जानकारी प्राप्त करने के तरीकों के बारे में भी बताया। टीम ने दलहन मिशन एवं तिलहन मिशन योजनाओं के संबंध में जागरूकता उत्पन्न की तथा फसल विविधीकरण के लिए अरहर (रेडग्राम) एवं मूंग (ग्रीन ग्राम) जैसी फसलों की खेती अपनाने का सुझाव दिया।

कार्यक्रम में कुल 60 किसानों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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