10 जून, 2026, अविकानगर
भाकृअनुप-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (सीएसडब्ल्यूआरआई), अविकानगर में 21वें राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम तथा महात्मा ज्योतिबा फुले कॉलेज ऑफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंस से आए 15 विद्यार्थियों के इंटर्नशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित कौशल विकास प्रशिक्षण में 45 किसानों ने पंजीकरण करवाया, जिन्हें भेड़ एवं बकरी पालन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार तोमर, निदेशक, सीएसडब्ल्यूआरआई, ने विद्यार्थियों एवं किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि भेड़ एवं बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि भेड़-बकरी पालन के चार प्रमुख स्तंभ—उन्नत नस्ल (ब्रीड), स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित पोषण एवं वैज्ञानिक आवास प्रबंधन (हाउसिंग)—पर विशेष ध्यान देकर पशुपालक अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से प्रशिक्षण अवधि का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि संस्थान में उन्हें पशुपालन एवं अनुसंधान से संबंधित आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा। साथ ही उन्होंने भारत सरकार द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के बारे में जानकारी देते हुए किसानों से रासायनिक उर्वरकों का संतुलित एवं आवश्यकता आधारित उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति एवं मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।
इस अवसर पर एनिमल फिजियोलॉजी अनुभाग के प्रभारी डॉ. एस. एस. डांगी, टीओटी एवं एसएस प्रभारी डॉ. एल. आर. गुर्जर, एलपीटी प्रभारी डॉ. अरविंद सोनी, वैज्ञानिक डॉ. पी. के. मलिक, डॉ. नृपेन्द्र प्रताप सिंह तथा तकनीकी अधिकारी गौतम चौपड़ा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं एवं किसानों में कौशल विकास को बढ़ावा देना तथा पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक ज्ञान एवं आधुनिक तकनीकों का प्रसार करना है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. एस.एस. डांगी ने किया।
(स्रोतः भाकृअनुप-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर)







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