भाकृअनुप-एनएमआरआई ने सस्टेनेबल पशुधन तथा पोल्ट्री सेक्टर के लिए कचरा वैल्यूएशन पर भाकृअनुप-प्रायोजित लघु पाठ्यक्रम का किया उद्घाटन

भाकृअनुप-एनएमआरआई ने सस्टेनेबल पशुधन तथा पोल्ट्री सेक्टर के लिए कचरा वैल्यूएशन पर भाकृअनुप-प्रायोजित लघु पाठ्यक्रम का किया उद्घाटन

28 जनवरी, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप–राष्ट्रीय मीट अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, ने 28 जनवरी, 2026 को भाकृअनुप-प्रायोजित लघु पाठ्यक्रम का उद्घाटन किया, जिसका शीर्षक है “विकसित भारत 2047 की ओर पशुधन तथा पोल्ट्री सेक्टर से कचरा वैल्यूएशन में इनोवेशन: संधारणीयता एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करना”। यह दस दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम 28 जनवरी से 06 फरवरी, 2026 तक भाकृअनुप-एनएमआरआरआई परिसर में आयोजित किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सुनील एस. हिरेमठ, वन संरक्षक एवं निदेशक, नेहरू जूलॉजिकल पार्क, हैदराबाद, उपस्थित थे। अपने संबोधन में, डॉ. हिरेमठ ने एकीकृत, पर्यावरण के अनुकूल कचरा प्रबंधन समाधानों के महत्व पर जोर दिया और विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रमों के माध्यम से क्षमता निर्माण की आवश्यकता को रेखांकित किया।

ICAR-NMRI Inaugurates ICAR-Sponsored Short Course on waste valorisation for sustainable livestock and poultry sector

डॉ. एस.बी. बारबुद्धे, निदेशक, भाकृअनुप-एनएमआरआरआई, ने उद्घाटन संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने पर्यावरणीय टिकाऊपन हासिल करने एवं विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन में योगदान देने में प्रगतिशील रूप से कचरा वैल्यूएशन प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर, शॉर्ट कोर्स की ट्रेनिंग मैनुअल औपचारिक रूप से जारी की गई।

डॉ. रितुपर्णा बनर्जी, कोर्स निदेशक, ने प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा शॉर्ट कोर्स का अवलोकन प्रस्तुत किया, जिसमें पशुधन तथा पोल्ट्री सेक्टर में सतत कचरा प्रबंधन प्रथाओं को आगे बढ़ाने तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों को बढ़ावा देने में इसके महत्व पर जोर दिया गया।

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इस कार्यक्रम में नौ भारतीय राज्यों के राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (सभी एसएयू) और भाकृअनुप संस्थानों के सहायक प्रोफेसर, वैज्ञानिक तथा एसोसिएट प्रोफेसर सहित कुल सोलह प्रतिभागी भाग लेंगे।

इस कार्यक्रम में भाकृअनुप-एनएमआरआरआई के स्टाफ सदस्य, छात्र और अनुसंधान कर्मी शामिल थे, जिनमें आरए, एसआरएफ और जेआरएफ शामिल है।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय मीट अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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