18–20 मई, 2026, बेंगलुरु
भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो (एनबीएआईआर), बेंगलुरु, ने 18 से 20 मई, 2026 तक “कीट जीनोम संपादन : सीआरआईएसपीआर /सीएएस प्रणालियों के सिद्धांत एवं व्यावहारिक अनुप्रयोग” विषय पर तीन दिवसीय आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन्नत कीट जीनोम संपादन प्रौद्योगिकियों में संस्थागत क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता को सुदृढ़ करना था।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भाकृअनुप जीनोम एडिटिंग परियोजना के अंतर्गत प्राप्त अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं अनुभव के आधार पर तैयार किया गया था, जिसने कार्यक्रम की व्यावहारिक रूपरेखा और पाठ्यवस्तु के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को कीट जीनोम संपादन की कार्यप्रणालियों का सैद्धांतिक ज्ञान तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण दोनों प्रदान किए गए।

प्रशिक्षण सत्रों में आरएनए इंटरफेरेंस (आरएनएआई), सीआरआईएसपीआर /सीएएस प्रणालियों के सिद्धांत तथा सीआरआईएसपीआर-आधारित निदान तकनीकों सहित विभिन्न विषयों को शामिल किया गया। व्यापक व्यावहारिक सत्रों में लक्षित जीन का चयन, ऑर्थोलॉग पहचान, कम्प्यूटेशनल उपकरणों की सहायता से गाइड आरएनए डिज़ाइन, भ्रूण संरेखण, प्री-ब्लास्टोडर्म भ्रूण माइक्रोइंजेक्शन, पीसीआर प्रवर्धन, जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस तथा अनुक्रमण (सीक्वेंसिंग) डेटा की व्याख्या पर प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान “जीन संपादन एवं आनुवंशिक कीट प्रबंधन” विषय पर एक विशेष व्याख्यान भी आयोजित किया गया, जिसमें जीनोम संपादन तकनीकों तथा आनुवंशिक उपायों के माध्यम से टिकाऊ कीट प्रबंधन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।

डॉ. टी. वेंकटेशन, कार्यवाहक निदेशक, भाकृअनुप–एनबीएआईआर, ने प्रतिभागियों से संवाद करते हुए भविष्य के कीट अनुसंधान एवं सतत कीट प्रबंधन के लिए उन्नत जीनोम संपादन तकनीकों में संस्थागत विशेषज्ञता विकसित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल का अपने-अपने अनुसंधान क्षेत्रों में प्रभावी उपयोग करने तथा आणविक कीट विज्ञान एवं क्रियात्मक जीनोमिक्स के क्षेत्र में सहयोगात्मक अनुसंधान को और मजबूत बनाने के लिए प्रेरित किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाकृअनुप–एनबीएआईआर के वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों एवं परियोजना कर्मियों सहित कुल 18 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों में कीट जीनोम संपादन प्रौद्योगिकियों के प्रति जागरूकता बढ़ी तथा उनकी व्यावहारिक दक्षताओं को सुदृढ़ करने में सफलता मिली।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु)







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