भाकृअनुप-डीओजीआर, पुणे द्वारा एमपीकेवी, राहुरी में एआईएनआरपीओजी की 17वीं वार्षिक समूह बैठक का आयोजन

भाकृअनुप-डीओजीआर, पुणे द्वारा एमपीकेवी, राहुरी में एआईएनआरपीओजी की 17वीं वार्षिक समूह बैठक का आयोजन

12–13 मई, 2026, पुणे

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय (भाकृअनुप-डीओजीआर) ने 12–13 मई, 2026 को महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ (एमपीकेवी), राहुरी में अखिल भारतीय समन्वित प्याज एवं लहसुन अनुसंधान परियोजना (एआईएनआरपीओजी) की 17वीं वार्षिक समूह बैठक का आयोजन किया। इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में देशभर से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विस्तार कर्मियों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया तथा प्याज एवं लहसुन अनुसंधान एवं विकास से संबंधित नवीन प्रगति तथा भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

उद्घाटन सत्र का शुभारंभ पुष्प स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना तथा अतिथियों के सम्मान के साथ हुआ। महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी के कुलपति डॉ. विलास खरचे ने अध्यक्षीय संबोधन देते हुए उत्पादकता, स्थिरता तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी प्रसार के महत्व पर बल दिया। उद्घाटन सत्र के दौरान एमपीकेवी तथा भाकृअनुप-डीओजीआर के प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।

ICAR-DOGR, Pune Organizes 17th Annual Group Meeting of AINRPOG at MPKV, Rahuri

इस अवसर पर डॉ. के.ई. लवांडे, पूर्व कुलपति, डीबीएसकेकेवी, दापोली तथा डॉ. विजय महाजन, पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-डीओजीआर, पुणे, सहित कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भारत में प्याज एवं लहसुन अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

डॉ. पी.एस. बोडके, अनुसंधान निदेशक, एमपीकेवी, राहुरी, ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि भाकृअनुप-डीओजीआ, पुणे के निदेशक (कार्यवाहक) डॉ. राम दत्ता ने परियोजना निदेशक की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए एआईएनआरपीओजी की प्रमुख उपलब्धियों तथा भावी कार्ययोजना पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्रों में प्रदर्शन मूल्यांकन एवं कार्यवाही प्रतिवेदन, आनुवंशिक संसाधन एवं फसल सुधार, फसल उत्पादन, फसल संरक्षण, तकनीकी कार्यक्रमों का निर्माण तथा हितधारकों की सहभागिता जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई। भाकृअनुप-डीओजीआर एवं सहयोगी केन्द्रों के वैज्ञानिकों ने किस्म विकास, जर्मप्लाज्म मूल्यांकन, प्रजनन रणनीतियाँ, पोषक एवं जल प्रबंधन, सतत उत्पादन तकनीकें, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन तथा विभिन्न क्षेत्रों में प्याज एवं लहसुन उत्पादन से संबंधित समस्याओं पर अपने महत्वपूर्ण शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

ICAR-DOGR, Pune Organizes 17th Annual Group Meeting of AINRPOG at MPKV, Rahuri

बैठकों के दौरान समन्वित नेटवर्क कार्यक्रम के अंतर्गत भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई, जिसमें जलवायु अनुकूलता, संसाधनों के कुशल उपयोग, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन तथा किसानों तक प्रभावी तकनीकी प्रसार पर विशेष जोर दिया गया।

हितधारक सहभागिता सत्र में अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी), जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) तथा पूर्वोत्तर पर्वतीय (एनईएच) कार्यक्रमों के अंतर्गत किसान-केंद्रित हस्तक्षेपों को रेखांकित किया गया। इसमें समावेशी विकास, विस्तार गतिविधियों तथा अनुसंधान संस्थानों, विकास एजेंसियों और उत्पादकों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर बल दिया गया।

पूर्ण बैठक (प्लेनरी सत्र) के दौरान विभिन्न तकनीकी चर्चाओं से प्राप्त प्रमुख सिफारिशों एवं कार्य बिंदुओं को प्रस्तुत किया गया। बैठक में प्याज एवं लहसुन की उत्पादकता, लाभप्रदता, स्थिरता तथा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु सहयोगात्मक एवं मांग-आधारित अनुसंधान की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

ICAR-DOGR, Pune Organizes 17th Annual Group Meeting of AINRPOG at MPKV, Rahuri

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. राम दत्ता ने डॉ. पी. एस. नाइक, डॉ. बी. पी. सिंह, डॉ. एस. बी. खरबड़े तथा डॉ. जी. के. ससाने सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों को सफल आयोजन हेतु उनके मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने परिषद की ओर से एजीएम आयोजित करने की अनुमति प्रदान करने हेतु डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप; डॉ. एस.के. सिंह, उप-महानिदेशक (बागवानी विज्ञान), भाकृअनुप; तथा डॉ. सुधाकर पांडेय, सहायक महानिदेशक (एफवीएस एवं एमपी), भाकृअनुप, नई दिल्ली के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

(स्रोत: भाकृअनुप–प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय, पुणे)

×