मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता आश्वासन पर जागरूकता-सह-क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता आश्वासन पर जागरूकता-सह-क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन

25 अप्रैल, 2024, नादिया

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता आश्वासन पर एक जागरूकता-सह-क्षमता निर्माण कार्यक्रम 'स्वस्थ धरा, खेत हरा' - स्वस्थ पृथ्वी, हरित खेत के नारे की परिकल्पना के साथ, राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड और भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता द्वारा आज संयुक्त रूप से कृषि विज्ञान केन्द्र (बीसीकेवी), नादिया में आयोजित किया गया।

Awareness-cum-Capacity Building Programme on Quality Assurance of Soil Testing Labs under Soil Health Card Scheme

मुख्य अतिथि, प्रो. जी. साहा, कुलपति, बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय ने मिट्टी परीक्षण की सटीकता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम की आवश्यकता को रेखांकित किया।

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता ने कृषक समुदाय को सटीक सिफारिशें प्रदान करने के लिए मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता आश्वासन के महत्व पर जोर दिया।

डॉ. डे ने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्ता परीक्षण को स्थापित प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए और सटीक एवं विश्वसनीय परिणाम सुनिश्चित करने के लिए उचित अंशांकन तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।

डॉ. दीपांकर रॉय, उप-निदेशक, कृषि (प्रशासन) पश्चिम बंगाल सरकार ने गुणवत्ता आश्वासन पर ध्यान केंद्रित करने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

डॉ. पी. बनर्जी, नोडल अधिकारी, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, नादिया ने राज्य में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के कार्यान्वयन पर चर्चा की।

सुश्री मालंचा दास, उप-निदेशक, एनएबीएल, कोलकाता ने कहा कि भारत में एनएबीएल विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोगशालाओं द्वारा प्रदान की जाने वाली परीक्षण और अंशांकन सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

डॉ. अविजित दास, पूर्व वरिष्ठ निदेशक और प्रमुख मूल्यांकनकर्ता, एनएबीएल ने मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की मान्यता/ प्रत्यायन के महत्व एवं प्रोटोकॉल पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में कुल 56 प्रतिभागियों ने प्रतिभागिता की।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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