श्री कैलाश चौधरी ने किया भाकृअनुप-अटारी, जोधपुर के नए प्रशासनिक भवन का उद्घाटन

12 अगस्त, 2019, जोधपुर

श्री कैलाश चौधरी, राज्य मंत्री, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने आज भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोधपुर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन का उद्घाटन किया।

Shri Kailash Choudhary inaugurates New Administrative Building of ICAR-ATARI, Jodhpur  Shri Kailash Choudhary inaugurates New Administrative Building of ICAR-ATARI, Jodhpur

मंत्री ने आने वाले वर्षों में मोठ, मूंग, बाजरा आदि की पसंदीदा किस्मों के संरक्षण और कृषि को व्यवसाय मॉडल के रूप में अपनाने पर जोर दिया। श्री चौधरी ने किसानों से आय बढ़ाने के लिए बागवानी (सब्जी, फल और फूल) को शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने वैज्ञानिक संगठनों, विशेषकर भाकृअनुप और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को आय सुरक्षा के साथ-साथ आजीविका सुरक्षा पर जोर देने का आग्रह किया।

श्री चौधरी ने छोटे और सीमांत श्रेणियों के किसानों की आय बढ़ाने के लिए माननीय प्रधान मंत्री द्वारा 10,000 किसान उत्पादक संगठनों के गठन पर प्रकाश डाला। श्री चौधरी ने राजस्थान के कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का भी दौरा किया।

डॉ. एस. के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, जोधपुर ने राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के 63 कृषि विज्ञान केंद्रों की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृषक समुदाय के लाभों के लिए कार्यक्रम-वार जानकारी भी दी। डॉ. सिंह ने आय, पोषण और आजीविका सुरक्षा के संवर्धन के लिए आगे का रास्ता और दिशा-निर्देश भी प्रस्तुत किया। उन्होंने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की भारत सरकार की पहल पर अमल करने के लिए जोर दिया।

डॉ. ओ. पी. यादव, निदेशक, भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर ने संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों, विशेष रूप से राजस्थान के शुष्क क्षेत्र के लिए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर प्रकाश डाला। उन्होंने मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा के लिए विभिन्न फसल प्रणालियों के तहत दालों को शामिल करने पर भी जोर दिया।

डॉ. पी. के. राय, निदेशक, भाकृअनुप-सरसों अनुसंधान निदेशालय, भरतपुर ने कृषक समुदाय के लाभों के लिए सरसों अनुसंधान की उपलब्धियों को रेखांकित किया।

डॉ. गोपाल लाल, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र, अजमेर ने मानव आहार में महत्त्वपूर्ण बीज मसालों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने राजस्थान के जोधपुर, नागौर, जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में उच्च उत्पादकता के लिए जीरे के विभिन्न तकनीकी पैकेज भी प्रस्तुत किए।

डॉ. ए. साहू, निदेशक, भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर ने प्रति वर्ष के आधार पर उच्च पारिश्रमिक प्राप्त करने के लिए भेड़ों की अविसन नस्ल को रेखांकित किया। उन्होंने भेड़ की आबादी के बदलते परिदृश्य के साथ-साथ तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में उनके प्रवासन के बारे में भी जानकारी दी।

केवीके-टोंक, जयपुर- I, भीलवाड़ा- I, उदयपुर- I, बाड़मेर- I और II और जोधपुर- I ने आयोजन के दौरान कृषक समुदाय के लाभों के लिए विभिन्न प्रदर्शन किए।

आयोजन में राजस्थान के 11 जिलों के 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोधपुर)