नए कृषि कानून पर कृषि विशेषज्ञों की राय

ICAR-IARI,

डॉ. आर. एस. परोदा, पूर्व महानिदेशक, भाकृअनुप एवं चेयरमैन, टास ने कहा कि किसानों को सक्षम बनाने वाले नए कृषि कानून सेल्फ हेल्प ग्रुप और एफपीओ की वकालत करते हैं। नए कृषि कानून को लेकर सरकार की साफ मंशा को जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि इससे लागत से अधिक लाभ कमाने की गुंजाईश बनी रहेगी।

 

 

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प्रोफेसर पंजाब सिंह, पूर्व कुलपति, बीएचयू ने नए कृषि कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि, एक तरफ जहाँ नए कृषि कानून से किसानों के खेत अन्न व खाद्य प्रसंस्करण के हब बनेंगे, वहीं विविध फसलों को पूरे भारत का बाजार मिलेगा। उन्होंने कहा कि फसल कटाई उपरांत अब किसानों को क्रय-केंद्रों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि बाजार अब सीधा किसानों के खेत में पहुँचेगा।

 

 

 

ICAR-IARI,राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी के बैनर तले आयोजित विचार-मंथन सत्र में कृषि विशेषज्ञों ने नए कृषि कानून का समर्थन करते हुए कहा कि एक तरफ वर्तमान सुधारों का उद्देश्य प्रतिस्पर्द्धी कृषि उपज मंडियों का निर्माण करना और किसानों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है तो दूसरी तरफ उन्हें लाभकारी बाजारों और कृषि व्यवसाय से जोड़ना है।

 

 

 

 

भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने नए कृषि क़ानूनों को नई हरित क्रांति का वाहक बताते हुए इसका समर्थन किया तथा इसे किसानों व कृषि क्षेत्रों के हक में बताया।