जलवायु परिवर्तन के दौर में फसलों का विविधीकरण जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर

श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया भा.कृ.अनु.प.-आईएआरआई, दिरपाइ चापोरि, गोगामुख, असम के परिसर का लोकार्पण

25 सितंबर, 2020

मुख्य अतिथि, श्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भा.कृ.अनु.प.-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, दिरपाइ चापोरि, गोगामुख, असम के परिसर का लोकार्पण किया।

जलवायु परिवर्तन के दौर में फसलों का विविधीकरण जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर  जलवायु परिवर्तन के दौर में फसलों का विविधीकरण जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमरजलवायु परिवर्तन के दौर में फसलों का विविधीकरण जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद एक कालखंड में खाद्यान के अभाव से गुजरने वाला यह देश आज किसानों के परिश्रम और वैज्ञानिकों के अनुसंधान के कारण उत्पादन केंद्रित होकर खाद्यान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि दलहन, तिलहन, दुग्ध आदि के उत्पादन में हम दुनिया के पहली और दूसरी नंबर पर कायम हैं। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि जलवायु अनुकूल खेती से ही किसानों की दोगुनी आय संभव हो पाएगी।  

श्री तोमर ने किसानों के हित में केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही तमाम योजनाओं की जानकारी दी और कहा कि 10000 नए किसान उत्पादक संगठनों के गठन का निर्णय सराहनीय है जो किसानों को कृषि उत्पादन के दौरान प्रौद्योगिकी, बेहतर बीज, उर्वरक, कीटनाशक, समुचित वित्त और उत्पादों के विपणन जैसी बड़ी चुनौतियों से निजात दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भा.कृ.अनु.प. ने अब तक बहुत-से नए किस्मों का ईजाद किया है जिसका प्रतिफल पूरे देश को मिल रहा है।

जलवायु परिवर्तन के दौर में फसलों का विविधीकरण जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर  जलवायु परिवर्तन के दौर में फसलों का विविधीकरण जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर

मंत्री ने परिसर के लोकार्पण के लिए भा.कृ.अनु.प. परिवार की सराहना की। उन्होंने आग्रह किया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन के अवसर पर लोकार्पित इस परिसर का नाम पंडित जी के नाम पर हों। उन्होंने कम पानी और समय अनुकूल उत्पादन लायक बीजों के ईजाद पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान समूचे पूर्वोत्तर के लिए लाभकारी साबित होगा तथा कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में अग्रणी भूमिका निभाएगा। श्री तोमर ने कहा कि बड़ी-से-बड़ी मंदियों और चुनौतियों के वक्त कृषि क्षेत्र ने डटकर मुक़ाबला किया है और देश को समस्याओं से निजात दिलाई है।

विशिष्ट अतिथि, श्री सर्बनन्दा सोनोवाल, मुख्यमंत्री, असम ने कहा कि इस संस्थान का निर्माण और परिसर का लोकार्पण पूरे पूर्वोत्तर राज्यों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने और उससे निजात पाने के लिए आज प्रौद्योगिकी के साथ-साथ पारंपरिक पद्धतियों में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में संस्थानों का लक्ष्य महज डिग्री देना नहीं होना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि, श्री कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथि, श्री प्रधान बरुआ, सांसद सदस्य, लखीमपुर, असम ने केंद्र सरकार की सराहना करते हुए कहा कि परिसर का लोकार्पण दरअसल सपने को हकीकत में बदलने जैसा है।  

विशिष्ट अतिथि, श्री रानोज पेगु, विधायक, धेमाजी, असम ने कृषि के हित में वर्तमान सरकार की नीतियों व योजनाओं से अवगत कराया।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) ने कहा कि भा.कृ.अनु.प.-आईएआरआई एक विश्वस्तरीय संस्थान है जिसने प्रौद्योगिकी,  कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि भा.कृ.अनु.प.-भा.कृ.अनु.सं., दिरपाइ चापोरि, गोगामुख, असम कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में  भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा।

श्री संजय कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं सचिव (भा.कृ.अनु.प.) भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

डॉ. तिलक राज शर्मा, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भा.कृ.अनु.प. ने सबका आभार व्यक्त किया।

(स्त्रोत: भा.कृ.अनु.प.-कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, नई दिल्ली)