जलवायु अनुकूल फसलों की खेती से ही किसानों की दोगुनी आय संभव: श्री नरेंद्र सिंह तोमर

श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया आईसीएआर-आईआईएमआर, हैदराबाद के नए भवनों का लोकार्पण

24 सितंबर, 2020

श्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भा.कृ.अनु.प.-भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद में पाँच नए भवनों – संस्थान भवन, फसल उन्नयन कार्य स्थल, पौष्टिक अनाज नवोन्मेष केंद्र, खाद्य प्रसंस्करण प्रयोगशाला और अतिथि गृह – का लोकार्पण किया।

जलवायु अनुकूल फसलों की खेती से ही किसानों की दोगुनी आय संभव: श्री नरेंद्र सिंह तोमर  जलवायु अनुकूल फसलों की खेती से ही किसानों की दोगुनी आय संभव: श्री नरेंद्र सिंह तोमरजलवायु अनुकूल फसलों की खेती से ही किसानों की दोगुनी आय संभव: श्री नरेंद्र सिंह तोमर

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने मानव जीवन में कदन्न के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि कार्य को सही रूप में अंजाम देने के लिए आवश्यक सुविधाओं का होना जरूरी है, और कदन्न के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि किसानों के परिश्रम और वैज्ञानिकों के अनुसंधान ने उत्पादन केंद्रित होकर हमें खाद्यान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर तो बनाया लेकिन इस प्रतिस्पर्द्धा में पौष्टिक फसलें उपेक्षित होती चली गईं। श्री तोमर ने आग्रह किया कि बदलते हुए जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के आय के स्त्रोत के तौर पर तथा पोषण सुरक्षा के दृष्टिकोण से पौष्टिक फसलों का भी अधिक मात्रा में उत्पादन जरूरी है, ताकि उन्हें सभी घरों तक पहुँचाया जा सके। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि जलवायु अनुकूल खेती से ही किसानों की दोगुनी आय संभव हो पाएगी।  

मंत्री ने कहा कि कदन्न के क्षेत्र में संस्थान द्वारा अब तक 160 से अधिक नए किस्मों का ईजाद किया जा चुका है जिसका प्रतिफल पूरे देश को मिल रहा है। श्री तोमर ने बताया कि 2018 को राष्ट्रीय कदन्न वर्ष घोषित करने के पश्चात संयुक्त राष्ट्र ने भी 2023 को अंतरराष्ट्रीय कदन्न वर्ष घोषित करने का निर्णय लिया है।

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श्री तोमर ने कहा कि कि देश भर में छोटे और सीमांत किसानों की संख्या लगभग 86 प्रतिशत हैं, जिन्हें कृषि उत्पादन के दौरान प्रौद्योगिकी, बेहतर बीज, उर्वरक, कीटनाशक, समुचित वित्त और उत्पादों के विपणन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मंत्री ने कहा कि ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा 10000 नए किसान उत्पादक संगठनों के गठन का निर्णय सराहनीय है जो किसानों को इन चुनौतियों से निजात दिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद देश भर के कृषि-विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और संबंधित संस्थानों के साथ मिलकर कृषि के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही है।

श्री कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहे तथा कहा कि आने वाले समय में सबको इसका लाभ मिलेगा।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) ने कहा कि आईसीएआर-आईआईएमआर, हैदराबाद पोषक तत्त्वों से परिपूर्ण कदन्न के नए-नए किस्मों सहित उसके उत्पादन व प्रसंस्करण में किसान हित के लिए लगातार कार्यरत है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार हेतु पौष्टिक अनाज नवोन्मेष केंद्र की भूमिका अहम होगी।

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डॉ. तिलक राज शर्मा, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भा.कृ.अनु.प. ने सबका आभार व्यक्त किया।

डॉ. विलास ए. टोणपि, निदेशक, आईसीएआर-आईआईएमआर, हैदराबाद ने इससे पहले अपने स्वागत संबोधन संस्थान की हालिया उपलब्धियों को रेखांकित किया तथा कार्यक्रम की जानकारी दी।

(स्त्रोत: भा.कृ.अनु.प.-कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, नई दिल्ली)