केवीके की कार्यशाला की समीक्षा का हुआ आयोजन

18 सितंबर, 2019, नई दिल्ली

श्री कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री ने आज राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में आयोजित ‘सी’ और ‘डी’ श्रेणियों के तहत और कुछ ‘बी’ श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले कृषि विज्ञान केंद्रों की एक दिवसीय समीक्षा कार्यशाला का उद्घाटन किया।

मंत्री ने 'सी' और 'डी' श्रेणियों के तहत आने वाले केवीके से कड़ी मेहनत करने का आग्रह किया। अगले मूल्यांकन में ‘ए’ श्रेणी को लक्षित करने के लिए उन्होंने केवीके को प्रोत्साहित किया। श्री चौधरी ने केवीके को किसानों के हित में काम करने के लिए कहा।

 Dr. Trilochan Mohapatra, Secretary (DARE) & DG (ICAR)

उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के तकनीकी बैकस्टॉपिंग और विभिन्न कृषि उपज के विपणन में केवीके की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने और देश के किसानों में विश्वास पैदा करने के लिए केवीके की क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने केवीके से आग्रह किया कि वे अपनी बुनियादी सुविधाओं और आवश्यकताओं आदि के बारे में भाकृअनुप के अधिकारियों को सूचित करें।

श्री चौधरी ने केवीके के आवधिक मूल्यांकन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने केवीके को राज्य सरकारों से धन सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने हालिया कार्यक्रमों जैसे कृषि कल्याण अभियान, जल शक्ति अभियान, राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम और वृक्षारोपण कार्यक्रम आदि में केवीके के सक्रिय भागीदारी के बारे में प्रकाश डाला। डॉ. महापात्र ने केवीके खासकर 'सी' और 'डी' श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले केवीके को मजबूत करने के लिए रणनीतियों को विकसित करने पर जोर दिया।

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डॉ. ए. के. सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केवीके से नई अवधारणाओं और प्रौद्योगिकियों के साथ आने, किसानों तक पहुँचने और किसानों के लिए एक उदाहरण स्थापित करने का आग्रह किया। डॉ. सिंह ने केवीके में खाली पदों को भरने, कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा केवीके को समय पर धनराशि जारी करने, पीएफएमएस में केवीके की मैपिंग, केवीके कर्मचारियों के बार-बार स्थानांतरण से परहेज करने, केवीके में प्रतिकृति प्रदर्शन इकाइयों के निर्माण, एफपीओ की तकनीकी बैकस्टॉपिंग आदि के लिए भी अपना मत रखा।

डॉ. वी. पी. चहल, अतिरिक्त महानिदेशक, (कृषि विस्तार), भाकृअनुप ने कार्यशाला की सिफारिशों को संक्षेप में प्रस्तुत किया।

डॉ. रणधीर सिंह, अतिरिक्त महानिदेशक (कृषि विस्तार) ने आभार प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में 63 केवीके के प्रमुखों के साथ भाकृअनुप और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि विस्तार प्रभाग, नई दिल्ली)