कृषि एवं ग्रामीण उद्यमों के प्रोत्साहन और विकास के लिए भाकृअनुप और एमएसएमई के संयुक्त कामकाज पर हुआ कार्यशाला का आयोजन

21 अगस्त, 2019, नई दिल्ली

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने आज राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में ‘कृषि एवं ग्रामीण उद्यमों के प्रोत्साहन और विकास के लिए भाकृअनुप और एमएसएमई के संयुक्त कामकाज पर कार्यशाला’ का आयोजन किया।

श्री प्रताप चंद्र सारंगी, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम और पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन राज्य मंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि मशीनीकरण पर जोर दिया। मंत्री ने किसानों को कृषि और खेती की आधुनिक तकनीकों से अच्छी तरह वाकिफ कराने पर जोर दिया।

Workshop on Joint Working of ICAR & MSME to Promote & Develop Agro and Rural Enterprises organized  Workshop on Joint Working of ICAR & MSME to Promote & Develop Agro and Rural Enterprises organized

श्री सारंगी ने किसानों से वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कृषि प्रौद्योगिकियों में नए नवाचारों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने वैज्ञानिकों और किसानों को ‘आइए एक साथ सोचें, काम करें और साथ रहें’ के मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया। मंत्री ने किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।

Workshop on Joint Working of ICAR & MSME to Promote & Develop Agro and Rural Enterprises organized  Workshop on Joint Working of ICAR & MSME to Promote & Develop Agro and Rural Enterprises organized

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने कृषि और ग्रामीण उद्यमों को प्रोत्साहित और विकसित करने के लिए भाकृअनुप और एमएसएमई के बीच हुई साझेदारी के बारे में जानकारी दी। महानिदेशक ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि मशीनीकरण किसानों की आय को दोगुना करने में मदद करेगा क्योंकि यह लागत, समय और श्रम को कम करता है जबकि उत्पादकता में वृद्धि। उन्होंने कहा कि भाकृअनुप कृषि मशीनीकरण की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

डॉ. महापात्र ने कहा कि यह उद्यम संबंधित संस्थानों की शक्ति और विशेषज्ञता का लाभ उठाकर कृषि और ग्रामीण उद्यमों के प्रोत्साहन और विकास हेतु स्थानीय स्तर पर समझौता ज्ञापनों को दर्ज करने के लिए अपने क्षेत्र प्रतिष्ठानों को एक मंच प्रदान करेगा।

महानिदेशक ने जोर दिया कि भाकृअनुप और एमएसएमई ने अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, कृषि उपकरणों के विकास और अन्य निर्दिष्ट क्षेत्रों में एक-दूसरे के साथ सहयोग करने के लिए पारस्परिक रूप से सहमति व्यक्त की है।

डॉ. अरुण कुमार पांडा, सचिव, एमएसएमई का मत था कि उन रणनीतियों को अपनाया जाए जो हालिया और आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों को वास्तविक उपयोगकर्ताओं (किसानों) तक पहुँचाने में मदद कर सकें। डॉ. पांडा ने एमएसएमई के कृषि-प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों और सामूहिक विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में सफलता के उदाहरणों का उल्लेख किया।

श्री राम मोहन मिश्रा, अतिरिक्त सचिव और विकास आयुक्त, एमएसएमई ने दोनों संगठनों के एक साथ मिलकर काम करने संबंधी महत्त्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया।

डॉ. के. अलगुसुंदरम, उप महानिदेशक, कृषि अभियांत्रिकी, भाकृअनुप, नई दिल्ली और श्री आर. के. राय, निदेशक, एमएसएमई ने इससे पहले संयुक्त तौर पर संबंधित संगठनों और सहकार्यता में उनकी भूमिकाओं के बारे में जानकारी दी।

श्री सुशील कुमार, अतिरिक्त सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं सचिव (भा.कृ.अनु.प.), डॉ. आनंद कुमार सिंह, उप महानिदेशक (बागवानी और फसल विज्ञान), भाकृअनुप के साथ भाकृअनुप और एमएसएमई मंत्रालय के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

इस अवसर के दौरान भाकृअनुप और एमएसएमई के ​​अधिकारियों और किसानों के बीच पारस्परिक विचार-विमर्श सत्र भी आयोजित किया गया था।

गणमान्य व्यक्तियों ने इस अवसर पर भाकृअनुप-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल के 'एग्रीकल्चर प्रोसेस इंजीनियरिंग' और 'कृषि अभियांत्रिकी दर्पण’ नामक शीर्षक से दो प्रकाशन जारी किए।

डॉ. शिव प्रसाद किमोठी, अतिरिक्त महानिदेशक, तकनीकी समन्वय, भाकृअनुप ने आभार प्रस्तुत किया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, पूसा, नई दिल्ली)