भाकृअनुप-सीआईएआरआई और डीएसटी ने कार निकोबार में हॉक्सबिल कछुआ को बचाया
भाकृअनुप-सीआईएआरआई और डीएसटी ने कार निकोबार में हॉक्सबिल कछुआ को बचाया

1 अप्रैल, 2024, पोर्ट ब्लेयर

समुद्री कछुओं की आबादी की निगरानी के लिए कार निकोबार द्वीप पर शुरू की गई नागरिक विज्ञान पहल के हिस्से के रूप में, टीटॉप गांव के निकोबारी मछुआरों ने कार निकोबार के तटीय जल में तैर रहे मछली पकड़ने के भूतहा जाल से एक किशोर हॉक्सबिल कछुए (एरेटमोचेलिस इम्ब्रिकाटा) को बचाया। इस तरह खोए हुए, परित्यक्त तथा छोड़े गए मछली पकड़ने के जाल, जिन्हें आम तौर पर भूतहा जाल के रूप में जाना जाता है, समुद्री कछुओं जैसे कमजोर समुद्री जीवों को उलझाते रहते हैं। 01 अप्रैल, 2024 की दोपहर को मछली पकड़ने की अपनी नियमित क्रियाओं के दौरान, मछुआरों ने पानी में बड़े पैमाने पर मछली पकड़ने वाले भूतहे जाल को तैरते हुए देखा, जिसमें एक जीवित कछुए के साथ-साथ एक मृत कछुआ भी फंस गया था। जिम्मेदार मछुआरों के एक समूह ने इस त्वरित कार्य में, जाल काटकर किशोर समुद्री कछुए को बचा लिया तथा कछुए को बिना किसी बाहरी चोट के तेजी से वापस समुद्र में छोड़ दिया गया।

ICAR-CIARI & DST rescues Hawksbill Turtle at Car Nicobar

इस प्रक्रिया के लिए, डॉ. ई.बी. चाकुरकर, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएआरआई के मार्गदर्शन में डॉ. आर. किरुबा शंकर के नेतृत्व में परियोजना की वैज्ञानिक टीम द्वारा प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान निर्देश दिया गया था। मछुआरों को सुरक्षित किया गया तथा उन्होंने घटना का वीडियो साझा किया, जिसमें बचाव और समुद्र में वापस छोड़ने की पूरी प्रक्रिया शामिल थी।

ये सफल संरक्षण कार्यक्रम विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा की गई नागरिक विज्ञान पहल का हिस्सा हैं, जो समुद्री कछुओं की सुरक्षा के प्रति कार निकोबार में आदिवासी मछुआरों को उचित जागरूकता एवं शिक्षा प्रदान करने तथा इन कमज़ोर समुद्री जीव समूहों पर पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने पर केन्द्रित है। ।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पोर्ट ब्लेयर)

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