30 सितंबर, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप–केनव्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और शुष्क भूमि कृषि समुदायों के बीच खाद्य एवं पोषण सुरक्षा बढ़ाने के लिए कर्नाटक राज्य के चिंचोली तालुक के कुशारामपल्ली थांडा में अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के तहत चना बीज और फल पौधों का प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम के तहत, 100 कृषक परिवारों को शामिल करते हुए कुशारामपल्ली थांडा, चिंदानूर और शिवारेड्डीपल्ली के तीन गांवों में प्रदर्शन के लिए चने की उन्नत किस्म केसीडी-11 के 2 टन बीज वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य किसानों के बीच उन्नत किस्मों और जलवायु-अनुकूल फसल उत्पादन पद्धतियों को अपनाने में सुविधा प्रदान करना था।

पोषण सुरक्षा और घरेलू बागवानी को बढ़ावा देने के लिए 45 किसानों को अनार, अमरूद, आम, नींबू और सीताफल के 600 फल पौधे वितरित किए गए, जिन्हें उनके घरों के पिछवाड़े/गृहवाटिकाओं तथा कृषि वानिकी क्षेत्रों में लगाने के लिए दिया गया।
इसके अलावा, किसानों ने चिंदानूर गांव में स्वच्छता सेवा गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया और स्वच्छता तथा सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने में योगदान दिया। यह कार्यक्रम सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाने और कूड़ा न फैलाने, प्लास्टिक तथा बहु-परतीय पैकेजिंग (एमएलपी) में कमी, सुरक्षित अपशिष्ट निपटान, स्वच्छता, व्यक्तिगत साफ-सफाई और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में जागरूकता पैदा करने पर केंद्रित गतिविधि के तहत आयोजित किया गया।

इस गतिविधि में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वच्छ पर्यावरण बनाए रखना एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसके लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। ग्रामीण स्वच्छता अभियान से संतुष्ट थे और उन्होंने भविष्य में गांव को साफ-सुथरा बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में शुष्क भूमि के किसानों की आजीविका और लचीलेपन को मजबूत करने के लिए उन्नत फसल किस्मों, बागवानी विविधीकरण और सामुदायिक भागीदारी को एकीकृत करने वाले हस्तक्षेपों के महत्व पर जोर दिया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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