हिंदी हमारी संस्‍कृति का हिस्सा है - डॉ. नंद किशोर आचार्य

16 सितंबर, 2019 बीकानेर

हिंदी हमारी संस्‍कृति का हिस्सा है - डॉ. नंद किशोर आचार्य  भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्‍क बागवानी संस्‍थान, बीकानेर में 14 से 28 सितंबर 2019 तक 'हिंदी पखवाड़ा' मनाया जा रहा है। आज इस पखवाड़े के विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

डॉ. नंद किशोर आचार्य, वरिष्‍ठ साहित्‍यकार, गृह मंत्रालय की हिंदी समिति के पूर्व सदस्‍य, रेलवे बोर्ड के हिंदी सलाहकार सदस्‍य, लेखक और चिंतक ने बतौर मुख्‍य अतिथि अपनी मौजूदगी दर्ज करते हुए कहा कि हिंदी कार्यक्रम की हिंदी भाषी राज्‍यों में कोई विशेष सार्थकता नहीं है। उन्‍होंने कहा कि हिंदी का कई स्‍थानों पर विरोध होता आया है, परंतु हिंदी भाषा का अन्‍य भारतीय भाषाओं से वैमन्‍स्‍य नहीं है। यह अन्‍य सभी भाषाओं को साथ लेकर चलने वाली भाषा है।

आचार्य जी ने आँकड़ों और शोध का हवाला देते हुए कहा कि 1950 से लेकर 2010 तक भारत की 220 बोलियाँ लुप्‍त हो चुकी हैं, इसलिए अपनी भाषा से प्रेम करना अनिवार्य है। अंग्रेजी भाषा के फैलते जाल के प्रति चिंता जताते हुए उन्‍होंने कहा कि यह इस देश की संस्‍कृति और भाषा के लिए मीठा जहर है।

प्रो. (डॉ.) पी. एल. सरोज, निदेशक, भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्‍क बागवानी संस्‍थान, बीकानेर ने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार में समाचार पत्रों के साथ-साथ हिंदी सिनेमा की विशेष भूमिका रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हिंदी को व्‍यापारियों ने भी संपर्क भाषा के रूप में विकसित किया है।

कृषि अनुसंधान को हिंदी के द्वारा व्‍यापक बनाने पर बल देते हुए प्रो. सरोज ने कहा कि इस संस्‍थान ने हिंदी भाषा में प्रकाशित विभिन्‍न पुस्तिकाओं, पत्रकों, आदि के माध्‍यम से अनुसंधान कार्य को किसानों तक पहुँचाया है।

डॉ. धुरेन्‍द्र सिंह, अध्‍यक्ष, आयोजन समिति ने इससे पूर्व हिंदी पखवाड़ा की रूपरेखा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पखवाड़े के दौरान कुल सात प्रकार की प्रतियोगिताएँ एवं कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

श्री प्रेम प्रकाश पारीक, राजभाषा अधिकारी ने गणमान्य अतिथियों का आभार प्रस्तुत किया।

(स्त्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्‍क बागवानी संस्‍थान, बीकानेर)