भाकृअनुप-सीफा ने "आत्मनिर्भर भारत के लिए टिकाऊ जलकृषि" पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया

23-24 सितंबर 2022, भुवनेश्वर

भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीव पालन अनुसंधान संस्थान (सीफा) ने एसोसिएशन ऑफ एक्वाकल्चरिस्ट्स (एओए) के सहयोग से अपने कौशल्य गंगा परिसर में 23-24 सितंबर, 2022 के दौरान "आत्मनिर्भर भारत के लिए टिकाऊ जलकृषि" पर राष्ट्रीय सम्मेलन (हिंदी में) आयोजित किया। सम्मेलन के पांच विषय थे (1) टिकाऊ जलकृषि प्रणाली; (2) मत्स्य पोषण; (3) मत्स्य आनुवंशिकी और जैव प्रौद्योगिकी; (4) मत्स्य स्वास्थ्य प्रबंधन और (5) सामाजिक-अर्थशास्त्र एवं आजीविका।

भाकृअनुप-सीफा ने "आत्मनिर्भर भारत के लिए टिकाऊ जलकृषि" पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि, डॉ. जे. के. जेना, उप महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान), भाकृअनुप, ने किया। उन्होंने भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन क्षेत्र के महत्व पर जोर दिया। डॉ. जेना इस बात पर प्रकाश डाला कि अंतर्देशीय मत्स्यपालन देश की मत्स्य पालन टोकरी में 65% से अधिक का योगदान दे रहा है। उपमहानिदोशक ने गुणवत्तापूर्ण मछली के उत्पादन और इसे समाज के सभी वर्गों के लिए इसकी सहज उपलब्धता का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि टिकाऊ  मत्स्य पालन के लिए जलीय पारिस्थितिक तंत्र और उनके जैविक समुदायों के स्वास्थ्य के बीच परस्पर सामंजस्य बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने जलकृषि में हितधारकों के लाभ के लिए उपयोगी उत्पादों/ प्रौद्योगिकियों का उत्पादन करने के लिए शोधकर्ताओं के बीच अधिक सहयोगात्मक माहोल का भी आह्वान किया।

मुख्य अतिथि, प्रो. पी. के. राउल, कुलपति, ओडिशा कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर, ओडिशा ने अपने संबोधन में अनुसंधान मूल्यों और टीम भावना पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर वांछनीय परिणामों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न संगठनों के बीच मत्स्य पालन और जलकृषि में सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास के पहल की आवश्यकता पर बल दिया।

इस कार्यक्रम के दौरान, डॉ. बी.पी. मोहंती, सहायक महानिदेशक (अंतर्देशीय मत्स्य पालन), भाकृअनुप विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। उन्होंने भाकृअनुप-सीफा के साथ लंबे जुड़ाव के लिए संस्थान और आयोजन समिति को धन्यवाद दिया। डॉ. मोहंती ने देश में अधिक से अधिक जलीय किसानों तक पहुंचने के लिए किसानों के लिए हिंदी में उपयोगी पत्रिका निकालने पर जोर दिया। उन्होंने ‘रंगीन मत्स्य पालन में एक मेगा अनुसंधान और विकास’ कार्यक्रम शुरू करने का भी सुझाव दिया।

शुरुआत में, डॉ. एस. के. स्वाईं, निदेशक, भाकृअनुप-सीफा ने इस बात को उद्धृत किया कि पिछले साढ़े तीन दशकों के समर्पित अनुसंधान प्रयास से संस्थान ने आर्थिक रूप से उपयोगी एवं महत्वपूर्ण मछली और सीप मोती के प्रजनन और पालन, एफआरपी पोर्टेबल हैचरी, मछली के विभिन्न जीवन चरणों के लिए फ़ीड, रोग निदान किट, बेहतर रोहू जयंती, सीफाब्रूडTM, सीफा जीआई­­ स्कैंपी और किसानों के लिए अन्य उपयोगी प्रौद्योगिकियां के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। डॉ स्वाईं ने 32000 के उपयोगकर्ता आधार वाले मत्स्यसेतु मोबाईल ऐप और इसके तेजी से प्रचलन में आने को लेकर, इस पर बा की। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे  भारत सरकार की एससीएसपी, एसटीसी और एनईएच जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से देश भर में अपने हितधारकों को समर्पित है।

विशिष्ट अतिथि, डॉ. बी.के. दास, निदेशक, भाकृअनुप-सिफ़री, बैरकपुर एवं अध्यक्ष, पीएफजीएफ, मुंबई ने जोर देकर कहा कि यह सम्मेलन मत्स्यपालन और जलीय कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर राजभाषा हिन्दी में कार्य करने पर विचार कर रहा है, जो आम जनता के लिए सर्व-सुलभ रहेगा। उन्होंने देश में अंतर्देशीय मत्स्यपालन की स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य विषयों जैसे, जलवायु परिवर्तन, आक्रामक प्रजातियों, कनेक्टिविटी, आर्द्रभूमि, जैव विविधता और भारत में जलीय प्रदूषण, बहाली और प्रबंधन आदि के सभी पहलुओं के बारे में बताया। इस सम्मेलन के दौरान  सारांश पुस्तक, राजभाषा पत्रिका निलीतीमा व एससीएसपी पत्रिका जैसे बहुमूल्य प्रकाशनों का अनावरण किया गया। चर्चा के आधार पर, भविष्य में नीतिगत मुद्दों के लिए आत्मनिर्भर भारत के लिए टिकाऊ जलीय कृषि पर कुछ सिफारिशें प्रदान की गईं।

डॉ. शैलेश सौरभ, सचिव, एओए और टीम ने सम्मेलन की व्यवस्था की। इस कार्यक्रम के दौरान ऑनलाइन एवं ऑफलाइन  माध्यमों के साथ 200 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठा जल जीव पालन अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर)