नई दिल्ली,5 जून 2010
मौसम पूर्वानुमान वह क्षेत्र है जहां अंतरिक्ष विज्ञान और इससे जुड़ी तकनीकें सहायक सिद्ध हो रही हैं, जो कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह बात डॉ. के. कस्तूरीरंगन, सदस्य, योजना आयोग ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
डॉ. कस्तूरीरंगन ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक, कृषि क्षेत्र की कार्यकुशलता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक उन्नत साधन है। अगर हरित क्षेत्र और जल संसाधनों का सही अनुमान लगाया जाए तो प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन आसान हो सकता है। चित्रों पर आधारित चेतावनी जारी करके फसलों में कीट एवं बीमारियों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। होने वाली पैदावार की सटीक भविष्यवाणी से लोक वितरण प्रणाली को अधिक कारगर बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अनुप्रयोग पहले से ही शीघ्र और प्रभावशाली ढंग से संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
मंगला राय, अध्यक्ष, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी ने भारतीय कृषि में परिवर्तन के लिए एक नवीन प्रारूप प्रस्तावित किया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि कृषि सहभागिता के लक्ष्यों को पाने के लिए क्षेत्र, परिस्थिति और प्रणाली आधारित योजनाएं बनानी होंगी। कृषि से जुड़े सभी अंशधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना सबसे अधिक जरूरी है।
इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अंतरिक्ष विज्ञान विभाग से जुड़े विभिन्न संस्थानों के महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी देने वाली किताब-डिग्रेडेड एंड वेस्डलैंड्स ऑफ इंडिया का विमोचन किया गया।
(Source: NAIP sub project on Mass Media Mobilization, DIPA)