आईसीएआर की क्षेत्रीय समिति-II की बैठक

हैदराबाद, 19 जुलाई, 2012

आईसीएआर की क्षेत्रीय समिति-II की 21वीं बैठक राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी (नार्म) में आयोजित की गई। इस बैठक का उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल महामहिम श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन ने किया। उन्होंने कहा कि किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिलना ही मूल समस्या है। श्री नरसिम्हन ने जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र विशेष के अनुसार तकनीक को अपनाना चाहिए तथा नई तकनीक को अपनाने में किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयोगशालाओं से खेतों में तकनीक के हस्तांतरण में और तेजी लाए जाने की आवश्यकता है क्योंकि किसान नई तकनीकों को अपनाते हुए दुविधा में पड़ जाते हैं।

डॉ. एच.पी. सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में वैश्विक समुदाय से नारियल क्षेत्र में उत्पादन और लाभप्रदता में सुधार लाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वैश्विक जीन बैंक को आनुवंशिक सम्पदा के बेहतर संरक्षण के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता है और इसके लिए सीजीआईएआर द्वारा वित्त उपलब्ध कराए जाने की संभावनाओं पर विचार किए जाना चाहिए।

इस अवसर पर डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, आईसीएआर ने कहा कि कृषि से सभी लोग सरोकार रखते हैं। उन्होंने बीज प्रतिस्थापन अनुपात और किस्मों के प्रतिस्थापन अनुपात से भी निपटे जाने पर जोर दिया।  

इससे पहले, डॉ.(श्रीमती) बी. मीनाकुमारी, उप महानिदेशक (मत्स्य पालन), आईसीएआर ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कृषि क्षेत्र के बहुमुखी विकास पर जोर दिया तथा कार्यक्रम में भाग लेने वालों से कृषि में क्षेत्रीय महत्व के स्थानों की पहचान तथा उन्हें प्राथमिकता में रखने का आह्वान किया।   

डॉ. एस.एल. गोस्वामी, निदेशक, नार्म ने कार्यक्रम में भाग लेने वालों का स्वागत किया तथा नार्म की उपलब्धियों को बताया।

डॉ. ए.पी. शर्मा, सदस्य तथा निदेशक सीआईएफआरआई ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।