मात्स्यिकी विभाग

विज़न
'सबके लिए मछली'

मिशन
अनुसंधान, शिक्षा और प्रसार कार्यक्रमों के जरिये भारतीय मात्स्यिकी एवं जलजीव पालन में सतत् विकास की स्थिति बनाते हुए मानव आवश्यकता और पर्यावास के बीच वैश्विक मात्स्यिकी की अहम भूमिका के मद्देनजर संतुलन बनाना।

अधिदेश

  • मात्स्यिकी अनुसंधान में परिषद की नीतियां बनाना और उनके क्रियान्वयन पर निगरानी रखते हुए मत्स्य अनुसंधान कार्यकलाप
  • विभिन्न मात्स्यिकी प्रणालियों में अनुसंधान कार्यक्रमों और प्रदर्शनों का समन्वयन करना और गतिशील बनाना।
  • मात्स्यिकी क्षेत्र में ज्ञान भंडार की तरह कार्य करना।

संगठनात्मक ढांचा

Organizational Structure of Fisheries Division

प्राथमिकता वाले क्षेत्र

प्रग्रहण मात्स्यिकी (समुद्री और अन्तः स्थलीय):

  • व्यावसायिक महत्व की समुद्री मत्स्य स्टॉक का प्रजाति अनुसार जैविक डेटाबेस और मौजूदा मत्स्य उत्पाद का आकलन।
  • दायित्वपूर्ण मात्स्यिकी की चुनौतियां स्वीकारना।
  • खुले जल में मात्स्यिकी प्रबंधन के कम्प्यूटर आधारित मॉडल।
  • समुद्री जैवविविधता डेटाबेस का विकास, जीआईएस प्लेटफार्म पर संरक्षण और प्रबंधन कार्य योजना बनाना।
  • दूर संवेदी प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए अन्तर्देशीय मत्स्य संसाधनों की क्षमताओं पर आधारित मानचित्रण करना जिसमें उत्पादन, प्रमुख प्रग्रहण रूझान, प्रजातियों का संगठन, पारिस्थितिकी दशाओं पर आधारित सूचनाओं का भी समवेशन शामिल है।
  • पारिस्थितिकी गुणों एवं मत्स्य उत्पादन के टिकाऊपन को बरकरार रखने के उद्देश्य से नदियों के आपसी जुड़ाव के प्रभाव का मत्स्य स्टॉक, जलजीव, जैवविविधता एवं पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन।
  • पारिस्थितिकी, अन्तः स्थलीय और समुद्री पर्यावरण में अत्यधिक जलवायु परिवर्तन के प्रभाव आदि मत्स्य व्यवहार अनुक्रिया पर दीर्घावधि डेटाबेस तैयार करना।
  • नकारात्मक प्रभावों को कम करने और नयी संभावनाएं तलाशने के लिए जलवायु परिवर्तन एक्शन प्लान का विकास।
  • तनावयुक्त जलजीव पारिस्थितकी का पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और जैव उपचार।
  • पर्वतीय मत्स्य संसाधन प्रबंधन का आकलन और कार्य योजना।  
  • जलाशयों, झीलों और बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में मात्स्यिकी में सुधार लाने के लिए अनुकूल प्रबंधन मॉडलों का शुरूआती परीक्षण।
  • समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों का निवारण।

जलजीव संवर्द्धन: (ताजा जल, खारा जल, समुद्री जीव संवर्द्धन, शीत जल):

  • समुद्री जीव संवर्द्धन और खुला समुद्री जलजीव संवर्द्धन के लिए टिकाऊ प्रौद्योगिकियों का विकास करना
  • ताजा जल और खारा जल जीव संवर्धन में अधिक क्षमतावान फिन/शैलफिश प्रजातियों और विभिन्न संवर्द्धन पद्धतियों द्वारा जलजीव संवर्द्धन विविधता लाना
  • उच्च मूल्य वाली फिन फिश और शैल फिश का प्रजनन और संवर्द्धन
  • जैविक जलजीव पालन
  • सामान्य बीमारियों के विरूद्ध मत्स्य स्वास्थ्य प्रबंधन, इम्यूनो प्रोफिलेक्सिस और उपचार
  • सजावटी मछली प्रजनन और पालन
  • क्षमतावान शीत जल मत्स्य प्रजातियों के लिए प्रजनन और संवर्द्धन प्रौद्योगिकियों में सुधार
  • अन्तः स्थलीय लवणीय जल क्षेत्रों के लिए जलजीव संवर्धन हेतु प्रौद्योगिकियों का विकास।
  • जलाशयों और जलोढ़ भूमि के लिए पेन और बाड़ा संवर्धन प्रौद्योगिकियों का विकास।
  • जीवित कीट आहार के रूप में मत्स्य पोषण आहार विकास और प्रौद्योगिकी।
  • अन्तः स्थलीय जलजीव पालन में जल का नियोजित प्रयोग।
  • विभिन्न जलजीव संवर्धन पद्धतियों के लिए जल पुनः चक्रण हेतु इकाईयों का विकास।
  • मौजूदा फिनफिश और शैलफिश प्रजातियों में विकास और रोग प्रतिरोधिता के लिए आनुवंशिक सुधार।

मत्स्य आनुवंशिकी और जैव प्रौद्योगिकी
:

  • जैव विविधता रिपोजटरी के विकास के लिए मत्स्य जर्मप्लाज्म संसाधनों की सूची तैयार करना।
  • मृत्यु उपरांत स्पर्म परिरक्षण और जीनोम संरक्षण की प्रौद्योगिकियों का विकास करना।
  • देशज़ और विदेशी, मत्स्य आयात जोखिम विश्लेषण और रोग निदान करना।
  • विभिन्न पारिस्थितिकियों में फिश और शैलफिश तथा संबद्ध टैक्सोनोमिक समूह के जोनोटाइप तैयार करना।
  • सूक्ष्मजीवाणुओं की आनुवंशिक सूची तैयार करना।
  • फिश और शैलफिश का साइटोजेनेटिक और जीनोटॉक्सिटी अध्ययन।
  • प्राथमिक मत्स्य उत्पादन और उत्पादों के लिए मानक और प्रमाणीकरण संबंधी नियमों का विकास करना।

मत्स्य प्रग्रहण और प्रग्रहण उपरांत
:

  • नयी पीढ़ी (ईंधन की कम खपत वाले) फिशिंग नौकओं और गियर्स के डिजाइन तैयार करना।
  • ईईजेड के लिए पर्यावरण हितैषी और उत्तरदायित्वपूर्ण मत्स्य तकनीकें।
  • मत्स्य प्रग्रहण, प्रसंस्करण और परिवहन में ऊर्जा संरक्षण।
  • फिश-बाई-केच के उपयोग की प्रौद्योगिकियों का विकास करना।
  • नदियों और जलाशयों से सतत् मत्स्य प्रग्रहण के लिए पर्यावरण हितैषी मत्स्य तकनीकों का विकास।
  • प्रग्रहण उपरांत हानि को कम करना और मत्स्य अवशिष्ट का प्रभावी उपयोग।
  • औषधीय महत्व के बायोएक्टिव तत्व निकालना।
  • सैनिटेशन, हाइजीन और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए प्रोटोकॉल।
  • गुणवत्ता प्रबंधन और सुरक्षा।

मत्स्य अभियांत्रिकी:

  • मछली पकड़ने और मत्स्य प्रसंस्करण के लिए उपकरणों का विकास करना।
  • मत्स्य प्रग्रहण और प्रग्रहण उपरांत कार्यों के लिए बायोइंफोर्मेटिक्स और आईटी आधारित समाधान।
  • जलजीव संवर्द्धन के लिए जलाशयों में रिसाव पर काबू पाने वाली तकनीकों का विकास करना।
  • छिद्रयुक्त और ढीली मृदा में मत्स्य फार्म निर्माण के लिए तकनीकों का विकास करना।

मत्स्य शिक्षा:

  • मात्स्यिकी, जलजीव पालन, प्रग्रहण-प्रग्रहण उपरांत, प्रसंस्करण, जलजीव पालन अभियांत्रिकी, जलीय पर्यावरण और मत्स्य-व्यवसाय प्रबंधन जैसे उभरते क्षेत्रों में मानव संसाधन विकास।
  • देश भर में मछली पालन और जलजीव पालन पर नीति निर्माण एवं प्रशासनिक दृष्टि से उपयोग संपूर्ण सूचना का दस्तावेज तैयार करना।

उपलब्धियां

  • मत्स्य बीज की वर्ष भर उपलब्धता के लिए कार्प में बहु प्रजनन करवाया गया और 17 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि वाली जयंती रोहू का विकास किया गया।
  • Mature rohu female ready for breeding during the month of JanuaryMature catla female ready for breeding during the month of FebruaryGenetically Improved Rohu (Jayanti)

  • श्रिम्प पालन के लिए कम लागत, शून्य जल विनिमय प्रौद्योगिकी का विकास किया गया।
  • श्रिम्प पालन के लिए अच्छा स्वास्थ्य और उच्च विकास प्रौद्योगिकी का कार्य प्रगति पर है।
  • अन्तः स्थलीय लवणीय क्षेत्रों में श्रिम्प पालन से अच्छे उत्पादन के सफल परीक्षण चल रहे हैं।
  • Shrimp farming pond in saline soil areaShrimp produced in saline soil pond

  • खारा जल में एशियन सीबास हेतु बीज उत्पादन और संवर्द्धन प्रौद्योगिकी।
  • Asian SeabassAsian Seabass hatcheryNursery rearing of Seabass

  • भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटों पर सीबास और लोबस्टर के उत्पादन के लिए खुला समुद्री बाड़ा तकनीक का विकास किया गया।
  • Open sea cage farming of  Asian Seabass at Chemmencherry, south of ChennaiOpen sea cage farming of  Asian Seabass at Chemmencherry, south of ChennaiHarvested Lobsters from Open Sea Cage

  • मंडपम में पहली बार कोबिया का प्रजनन और लार्वा पालन किया गया।
  • Broodstock of CobiaHatchlings of CobiaFingerlings of Cobia

  • समुद्री सजावटी मछलियों का ब्रूडस्टॉक विकास, प्रजनन और लार्वा पालन किया गया।
  • AmphiprionPomacentrus sabaePomacentrus caeruleus

  • ट्राल जाल में शिशु और कछुओं के बचाव हेतु निष्कर्षक पुरस्कार विजेता डिवाइस।
  • गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए बड़ी मैश साइज पर्स जाली का विकास।
  • Loading of large mesh purse seine net on fishing boatA view of the yellowfin caught in the new CIFT designed large mesh purse seine

  • कटलफिश, स्क्विड, थ्रेडफिन ब्रीम, तिलापिया और मेजर कार्प से मूल्य वर्धित उत्पादों की उत्पादन प्रक्रिया का मानकीकरण किया गया।
  • value added productsvalue added products
    value added productsvalue added products

  • पके मत्स्य उत्पादों को ताजा रखकर उनकी गुणवत्ता बनाये रखने के लिए सुविधाजनक पाऊच में पैकेजिंग प्रणाली का विकास किया गया।
  • समुद्री स्तनपायी प्राणियों की माइटोक्रोन्ड्रियल डीएनए क्रम आधारित प्रजाति पहचान और पीसीआर आधारित लिंग पहचान का मानकीकरण किया गया।
  • श्रिम्प में श्वेत धब्बा रोग जांच की विधि और पीत शीर्ष वायरस की जांच की तकनीक विकसित की गयी।
  • White Spot Syndrome Virus detection kit  (Nested PCR method)White Spot Syndrome Virus detection kit  (Nested PCR method)

  • कुरूमा श्रिम्प मारसुपेनियस जेपोनिकस, जलजीव पालन के क्षेत्र में क्षमतावान प्रजाति का ब्रूड स्टॉक विकास और पालन किया गया।
  • एम. जेपोनिका का सफल पालन किया गया। इसकी जीवितता दर 83 प्रतिशत और उत्पादन 1018 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर प्रति 4 माह किया गया।
  • येलो केटफिश, होराबारगस ब्रेकीसोमा और ताजाजल ईल मासटेसेमेबेलस एक्यूलेट्स का सफल प्रजनन किया गया।
  • विशालकाय ताजाजल प्रॉन मैक्रोबेकियम रोसेनबर्गी का अंतस्थलीय लवणीय जल में पालन किया गया।
  • हनी कॉम्ब ग्रुपर के एपीनेफेलस मेर्रा के लिए लार्वा पालन प्रोटोकॉल विकसित किया गया।
  • इंडियन पर्ल ऑयस्टर पिनक्टाडा फ्यूकाटा और एबेलोन, हेलियोटिस वेरिया में प्रयोगशाला में ऊतक संवर्द्धन तकनीक से सफल मोती उत्पादन किया गया।
  • पिनक्टाडा फ्यूकाटा मोतियों में लौह और मैगनीज़ जैसी भारी धातुओं के प्रयोग से चमकीले नीले और चमकीले गुलाबी रंग के मोतियों का उत्पादन किया गया।
  • सैंड लोबस्टर की दो प्रजातियों (थेनस ओरियन्टेलिस, स्कीलेरस रूगोसस) का बंदी अवस्था में सफलतापूर्वक प्रजनन किया गया।
  • Ornamental feed Varuna

  • समुद्री सजावटी मछलियों के लिए देसी आहार 'वरुणा' का विकास किया गया।.
  • हैचरी में चमकीले बैक्टीरिया के नियंत्रण के लिए प्रोबायोटिक तैयार किया गया है।
  • 15 मत्स्य प्रजातियों और मैक्रोब्रेकियम रोजनबर्गी के लिए पॉलीमार्फिक माइक्रोसेटलाइट और एलोजाइम मार्कर विकसित किये गये।
  • 34 कुलों और 9 क्रमों की 126 फिनफिश प्रजातियों की कार्यो-मार्फोलोजिकल सूचना वाले डेटाबेस 'फिश क्रोमोसोम वर्ल्ड' का विकास किया गया।.
  • गंगा के मैदानों में विभिन्न नदियों से लेबियो रोहिता, कतला कतला, सिररहिनस मृगला, लेबियो डेरो और एल. डाइकेलिस में एलोजाइम और माइक्रोसैटेलाइट का प्रयोग करके स्टॉक स्ट्रक्चर विश्लेषण किया गया।
  • भीमताल झील में गोल्डन महसीर का बाड़ा पालन, प्रजनन और बीज उत्पादन किया गया।
  • Cage rearing of broodstock of Golden MahseerCage rearing of broodstock of Golden MahseerSeed of Golden Mahseer

  • राष्ट्रीय नीतिगत योजना के समर्थन में जलीय देशी और विदेशी प्रवेशन की मार्गदर्शिका का विकास करके, प्रकाशन किया गया।
  • पर्वतीय क्षेत्रों के लिए स्थानिक और ऊंचाई विशेष कम्पोजिट कार्प पालन प्रौद्योगिकी का विकास किया गया। उत्तरी-पूर्वी राज्यों में चायनीज़ कार्प पद्धति का प्रदर्शन किया गया।
  • Fish farm at Zero, Arunachal PradeshFish farm at Zero, Arunachal Pradesh

  • बाड़ा और संवर्द्धन प्रौद्योगिकी में छोटे जलाशयों से 220 कि.ग्रा./हैक्टर/वर्ष उच्च मत्स्य उत्पादन प्राप्त किया गया जबकि राष्ट्रीय औसत उत्पादन 20 कि.ग्रा./हैक्टर/वर्ष है।
  • Fish production in reservoirsCage Culture in reservoirs

  • पेनकल्चर प्रौद्योगिकी द्वारा पोखरों, जलोढ़ स्थानों से भी 100-200 कि.ग्रा./हैक्टर/प्रति वर्ष से लेकर 1000 कि.ग्रा./हैक्टर/वर्ष तक उच्च उत्पादन लिया गया।
  • Penculture technologyPenculture technologyPenculture technology

  • एलपीजी/बायोगैस वाले (सीआईएफटी-सीआरवाईईआर-एसडीएल 250) 250 कि.ग्रा. क्षमता वाला हाइब्रिड सोलर फिश ड्रायर का विकास किया गया। इससे नियंत्रित पारिस्थितियों में आकर्षक रंग के साथ उत्पादन की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।
  • Dedication of 'CIFT DRYER—SDL 250' to the NationDedication of 'CIFT DRYER—SDL 250' to the Nation

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव :

उपयुक्त क्राफ्ट और गिअर विकास, अन्तः स्थलीय, खारा जल, समुद्री और शीत जल मत्स्य संसाधनों का प्रबंधन; अन्तः स्थलीय, खारा जल, समुद्री मछली और शैलफिश पालन प्रौद्योगिकियां; आहार का विकास; प्रग्रहण और प्रग्रहण उपरांत प्रौद्योगिकी; मूल्य संवर्द्धन जैसी मत्स्य संभाग द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को एजेंसियों के जरिये, प्रशिक्षण, लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रमों, परामर्शदात्री सेवाओं और अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों द्वारा लोकप्रिय बनाया जा रहा है। देशभर में कार्प पालन प्रौद्योगिकी के वृहत प्रदर्शन से ताजा जलजीव उत्पादन पर बेहद असर हुआ है और औसत राष्ट्रीय उत्पादन 3 टन/हैक्टर/वर्ष और मत्स्य उत्पादन 35 लाख मिलियन टन हो गया है। सघन कार्प बीज जलाशय उत्पादन की प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप 2400 करोड़ फ्राई का मत्स्य बीज उत्पादन हो सका। इसी तरह ट्रालर, पर्स साइन्स और उन्नत गिअर प्रौद्योगिकी के प्रयोग और संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन से समुद्री मछलियों का प्रग्रहण 30 लाख टन तक पहुंच गया है।

मात्स्यिकी संभाग ने चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर काम किया है जैसे मछली पालन और जलजीव पालन पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, प्रभावित होने की क्षमता, उसके अनुरूप बदलाव और इसके प्रभाव को कम करना आदि। अन्तः स्थलीय जलजीव पालन में पानी के नियोजन की भी शुरूआत की गयी है। भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटो पर स्थित कई केन्द्रों पर मछली और लॉबस्टर का खुला समुद्री बाड़ा पालन, हैचरी उत्पादन तथा श्रिम्प और एशियन सीबास का जलाशय उत्पादन का प्रदर्शन किया जा रहा है। कार्प, श्रिम्प, और सीबास की विभिन्न अवस्थाओं के लिए आहार विकसित किया गया है और इनके व्यावसायिक उत्पादन के लिए निजी उद्यमियों को प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण।

भविष्य की रूपरेखा :

  • मछली पालन और जलजीव पालन पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव।
  • नयी पीढ़ी के, कम ईंधन खपत वाली, बहुउद्देश्य मत्स्य नौकओं के डिजाइनों का विकास।
  • गहरे जल की मछलियों को पकड़ने के लिए बड़ी मैश साइज की पर्स जाली जैसे उन्नत गिअरों का विकास।
  • अन्तः स्थलीय और तटीय जलजीव पारिस्थितिकी के स्वास्थ्य की निगरानी।
  • निम्न श्रेणी जल संसाधनों की जैव उपचार प्रक्रिया की प्रौद्योगिकी का विकास।
  • अन्तः स्थलीय जल जीव पालन में जल का नियोजित प्रयोग।
  • सजावटी मछलियों का बीज उत्पादन और पालन प्रौद्योगिकी।
  • अन्तः स्थलीय और खारा जल जीव पालन में प्रजाति विविधता।
  • जैविक पालन नियमों पर आधारित कम लागत-कम आदान वाली श्रिम्प पालन प्रौद्योगिकी।
  • फिश और शैलफिश के लिए खुला समुद्री पालन।
  • कम कीमत के ‘रेडी टू ईट’ मछली उत्पाद।
  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों के मछली उत्पाद और उपोत्पाद बनाने के लिए सुधरी प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियां।
  • जलीय संसाधनों से बायोएक्टिव और औषधीय महत्व के उत्पादों का विकास।
  • मत्स्य प्रग्रहण और प्रगहण उपरांत हानि को कम करना।
  • मत्स्य अपशिष्ट उपयोग।
  • सीफूड (समुद्री आहार) सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकों का विकास।

संपर्क सूत्र


डा. जयकृष्ण जेना, उप महानिदेशक (मात्स्यिकी)
मात्स्यिकी संभाग, कृषि अनुसंधान भवन - II, नई दिल्ली - 110 012 भारत.
फोनः (कार्यालय) 91-11-25846738, 91-11-25842284/85/62/70/71 एक्स. 1309; फैक्सः 91-11-25841955 ई-मेलः ddgfs [dot] icaratgov [dot] in